परमाणु ख़तरे को कम आंका गया: संयुक्त राष्ट्र

वैज्ञानिक
Image caption आईएईए इंस्पेक्टरों ने जापान के फुकुशिमा में एक हफ़्ता बिताया

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु ऊर्जा एजेंसी का कहना है कि जापान में सुनामी से परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर होने वाले ख़तरे को कम आंका गया है.

हालांकि 11 मार्च को भूकंप के बाद आई सुनामी के बाद परमाणु ख़तरे को लेकर जो कदम उठाए गए वह प्रभावशाली थे.

अंतराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में इस हादसे से निपटने के लिए एक सख़्त आपात केंद्र की ज़रुरत बताई.

जापान का फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र, जो सुनामी के बाद बुरी तरह से तबाह हो गया था उससे अभी भी विकिरणें निकल रही हैं.

आईएईए इंस्पेक्टरों ने जापान के फुकुशिमा में एक हफ़्ता बिताया और परमाणु संकट पर एक रिपोर्ट तैयार की.

इस रिपोर्ट का सरांश जापान सरकार को दे दिया गया है.

ये पूरी रिपोर्ट इस महीने के अंत में विभिन्न देशों की वियना में होने वाली बैठक में सौंप दी जाएगी. इसका मक़सद दुनियाभर में परमाणु सुरक्षा को बेहतर बनाना है.

कमियां

संयुक्त राष्ट्र की इस टीम में ब्रिटेन के परमाणु सुरक्षा अधिकारी माइक वेटमैन से साथ साथ फ्रांस,रुस,चीन और अमरीका के भी अधिकारी भी शामिल थे.

ये रिपोर्ट कई कमियों को चिन्हित करती है जिसमें समुद्र तटीय सुरक्षा भी शामिल है.

इन परिणामों पर वियना में हो रही बैठक में चर्चा की जाएगी.

इंस्पेक्टरों का कहना है कि जापान ने सुनामी से होने वाले परमाणु उर्जा स्टेशन के ख़तरे को कम आंका है. हालांकि जो एक बड़ी फॉल्ट लाइन है वह समुद्र के तट के एकदम निकट है और फुकुशिमा प्लांट उससे केवल छह मीटर ऊंचाई पर लगा हुआ है.

इस रिपोर्ट में एक स्वतंत्र नियामक के महत्व पर ज़ोर दिया गया है.

जापान में लोग इस बात की आलोचना कर रहे है क्योंकि परमाणु सुरक्षा एजेंसी वहां उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आता है.

जापान सरकार ने आईएईए को यहां आमंत्रित किया था ताकि ये बताया जा सके कि फुकुशिमा में जो कुछ हुआ, उससे सबक़ लिया जा रहा है.

सुरक्षा को लेकर जारी चिंताओं के बीच 54 में से केवल 17 रिएक्टर ही काम कर रहे है.

वहीं ये आशंका भी जताई जा रही है कि इस गर्मी में बिजली की सप्लाई में कमी आ सकती है और दफ़्तरों में काम करने वाले लोगों से आग्रह किया गया है कि वे एयर कंडीशनर के इस्तेमाल में कटौती करने के लिए सूट की बजाय टीशर्ट पहनें.

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