अनाथ भालू पर बहस

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Image caption फ़िलहाल ये भालू चार महीने का है लेकिन इस प्रजाति के भालू वयस्क होने पर 350 किलोग्राम के हो जाते हैं. ये दुनिया के कुछ सबसे बड़े मासांहारियों में शामिल हैं.

एक अनाथ नर भालू पूर्वी यूरोप के देश स्लोवेनिया में लोगों को अपने कारनामों से हैरान कर रहा है.

और अब सरकार उसे वन्यजीव केंद्र में ले जाने का प्रयास कर रही है.

मेडो के नाम से मशहूर इस भालू को मीडिया ने तक़दीर वाला क़रार दिया है. ये स्लोवेनिया के एक गांव के लोगर परिवार के घर क़रीब महीना भर पहुंचा था.

परिवार के सदस्य इस भालू से बहुत प्यार करते हैं और ये भालू परिवार के कुत्ते और घर पर रखे फ़र्निचर से ख़ूब खेलता है.

लेकिन अधिकारियों का कहना है कि चार महीने का ये भालू बड़ा होने के बाद ख़तरनाक साबित हो सकता है. उधर परिवार ने भालू के एक बाड़े का निर्माण करने की इजाज़त मांगी है.

स्लोवेनिया में इस भालू की कहानी मीडिया में ख़ूब छाई हुई है. ऐसा माना जा रहा है कि भालू को उसकी मां ने छोड़ दिया है.

इस भूरे रंग के भालू का वैज्ञानिक नाम उर्सस आर्कटॉस है और वयस्क होने पर इसका वज़न साढ़े तीन सौ किलो तक पहुंच सकता है. ये दुनिया में सबसे बड़े मांसाहीर प्राणियों में से एक है.

शायद इसी वजह स्लोवेनिया का वन्यजीव विभाग चिंतित है.

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