नशीली दवा की नीति बदलने की सिफ़ारिश

  • 2 जून 2011
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Image caption नशीली दवाओं से जुड़े अपराध को लेकर सरकारें चिंतित रही हैं

राजनीतिज्ञों और पूर्व विश्व नेताओं के एक समूह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नशीली दवाओं के ख़िलाफ़ दुनिया का संघर्ष विफल हो गया है.

नशीली दवाओं पर नीति बनाने के लिए गठित वैश्विक आयोग की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एक ऐसा क़ानून बनाया जाना चाहिए जिससे कुछ नशीली दवाओं को वैध घोषित किया जा सके और नशा करने वालों के आपराधिकरण को रोका जा सके.

इस समूह में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफ़ी अन्नान के अलावा मैक्सिको, कोलंबिया और ब्राज़ील के पूर्व नेता और सुपरिचित उद्यमी रिचर्ड ब्रैनसन हैं.

लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए कहा है कि ये दिशाहीन है.

रिपोर्ट

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नशीली दवाओं के ख़िलाफ़ बनाई गई नीति विफल हो गई है क्योंकि इससे संगठित अपराध को बढ़ावा मिला है, करदाताओं पर लाखों डॉलर का बोझ पड़ा है और इसकी वजह से हज़ारों लोगों की मौतें हुई हैं.

इस रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र के आकलन का हवाला देकर कहा गया है कि वर्ष 1998 से 2008 के बीच दुनिया भर में अफ़ीम युक्त मादक द्रव्य की खपत में 35 प्रतिशत, कोकेन की खपत में 27 प्रतिशत और भांग की खपत में 8.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.

रिपोर्ट लिखने वालों ने सरकारों के उस दावे की निंदा की है जिनमें कहा गया है कि नशीली दवा के ख़िलाफ़ संघर्ष असरकारी रहा है.

इसके अनुसार, "राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों को खुले आम वो बात स्वीकार करनी चाहिए जो वे निजी तौर पर स्वीकार करते हैं कि परिणामों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि दमन की नीतियाँ नशीली दवाओं की समस्याओं को समाप्त नहीं कर सकतीं और नशीली दवा के ख़िलाफ़ संघर्ष को नहीं जीता जा सकता."

रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि नशा करने वाले लोगों को जो 'किसी को नुक़सान नहीं पहुँचाते' उनको अपराधी ठहराने के स्थान पर दूसरे क़ानूनी विकल्पों पर विचार करना चाहिए, जिससे एक तो नशीली दवा को लेकर हो रहे संगठित अपराझ में कमी आएगी और दूसरे नशीली दवा लेने वालों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ दी जा सकेंगीं.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में सरकारों से उन नीतियों को अपनाने की सलाह दी है जिसके बारे में अपने अनुभव के आधार पर कहा जा सकता है कि उससे अपराध घटेगा और आर्थिक-सामाजिक विकास को बढ़ावा मिल सकेगा.

अमरीका की निंदा

आयोग ने विशेष रूप से अमरीका की निंदा करते हुए कहा है कि उसे अपने अपराध-विरोधी दृष्टिकोण को छोड़कर ऐसी नीति अपनानी होगी जिसकी जड़ें स्वास्थ्य सुधार और मानवाधिकार में हों.

कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति सीज़र गैविरिया का कहना है, "हम उम्मीद करते हैं कि ये देश (अमरीका) कम से कम ये सोचना शुरु करेगा कि दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं."

हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें कोई उम्मीद नहीं है कि अमरीका कोई ऐसी नीति बनाएगा जो दूसरे देशों के हित में होगा.

लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस में नशीली दवाओं के मामले के अधिकारी गिल केर्लिकोवस्की ने इस आयोग की रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है.

अमरीका के नेशनल ड्रग कंट्रोल पॉलिसी के प्रवक्ता ने कहा, "नशा की लत एक बीमारी है और इसका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है."

उन्होंने कहा, "रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि नशीली दवाएँ और आसानी से उपलब्ध करवा दी जाएँ लेकिन इससे तो समाज को स्वस्थ्य और सुरक्षित रखना और कठिन हो जाएगा."

आयोग

19 सदस्यीय इस आयोग में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफ़ी अन्नान के अलावा अमरीका के केंद्रीय बैंक के पूर्व चेयरमैन पॉल वॉकर, कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति सीज़र गैविरिया और ग्रीस के वर्तमान प्रधानमंत्री जॉर्ज पापेंद्रू हैं.

विख्यात लातिन अमरीकी लेखक कार्लोस फ़्यूएंतेस और मारियो लोसा, यूरोपीय संघ में विदेश नीति विभाग के पूर्व प्रमुख जैवियर सोलाना और अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज शुल्ज़ भी इसके सदस्य हैं.

सुपरिचित उद्यमी रिचर्ड ब्रैनसन भी इसके सदस्य हैं.

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