इतिहास के पन्नों से

तीन जून को भारत के बंटवारे का ऐलान हुआ था, भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर को घेरा था और पैरिस में एक बड़ी विमान दुर्घटना हुई थी.

1947 : बंटवारे का ऐलान

Image caption बंटवारे का ऐलान होने के बाद बड़ी तादाद में पलायन हुआ जिसमें हज़ारों लोग मारे गए.

ब्रिटिश राज में भारत के आखिरी वायसरॉय लॉर्ड माउंटबैटन ने भारत के बंटवारे का ऐलान किया था.

माउंटबैटन ने अपने भाषण में कहा था, "एक समुदाय के अधिकांश लोगों को उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ ऐसी सरकार के तहत जीने को मजबूर करने का सवाल ही नहीं उठता जिसमें किसी दूसरे समुदाय के लोग बहुसंख्यक हों."

माउंटबैटन ने कहा कि ऐसे में बंटवारे के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

दोनों देशों की सीमाएं तय करने के लिए ब्रिटेन के न्यायाधीश सिरिल रैडक्लिफ़ को भारत बुलवाया गया.

क़रीब 10 हफ्तों बाद 14 अगस्त को लॉर्ड माउंटबैटन ने कराची में एक नए देश पाकिस्तान और अगले दिन यानी 15 अगस्त को दिल्ली में भारत के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

1984: भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर को घेरा

Image caption स्वर्ण मंदिर परिसर में अकाल तख़्त सहित कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं.

भारत के अमृतसर में बने सिख धर्म के सबसे पावन स्थल स्वर्ण मंदिर परिसर को तीन जून 1984 को भारतीय सेना ने घेर लिया था.

चार जून को सेना ने गोलीबारी शुरु कर दी लेकिन चरमपंथियों की ओर से इतना तगड़ा जवाब मिला कि पाँच जून को बख़्तरबंद गाड़ियों और टैंकों का इस्तेमाल किया गया.

स्वर्ण मंदिर में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ की गई इस सैन्य कार्रवाई - ऑपरेशन ब्लूस्टार - में भीषण ख़ून-ख़राबा हुआ. अकाल तख़्त पूरी तरह तबाह हो गया, स्वर्ण मंदिर के कई और हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पुस्तकालय बुरी तरह जल गया.

भारत सरकार के श्वेतपत्र के अनुसार 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए. इसी श्वेतपत्र के अनुसार 493 चरमपंथी या आम नागरिक मारे गए, 86 घायल हुए और 1592 को गिरफ़्तार किया गया था.

1962 : पैरिस में हवाई दुर्घटना, 130 की मौत

तीन जून 1962 को एयर फ्रांस का एक निजी विमान, बोइंग 707, पैरिस के ओर्ली हवाई अड्डे पर उड़ान भरने के समय दुर्घटना ग्रस्त हो गया.

इस हादसे में विमान में सवार सभी 130 लोगों की मौत हो गई. हालांकि विमान के चालक दल में से दो महिलाएं बच गईं और उन्हें छोटी-मोटी चोटें ही आईं.

इस हादसे की गिनती दुनिया के सबसे बुरे विमान हादसों में की जाती है.

बाद में हुई जांच में पता चला कि हादसा किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ लेकिन जब तक पायलट को इस बात का पता चलता, बहुत देर हो चुकी थी.

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