इतिहास के पन्नों से

इतिहास में 4 जून के दिन चीन में 1989 थ्यान आनमन चौक पर नरसंहार हुआ था और नेपाल में ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह का राज्याभिषेक हुआ था.

1989 : चीनी सेना द्वारा सैकड़ों युवा लोकतंत्रवादी प्रदर्शनकारियों का क़त्ल

Image caption प्रदर्शनकारियों को इस तरह की कार्रवाई की उम्मीद नहीं थी

चीन की राजधानी बीजिंग में क़रीब सात सप्ताह से बैठे प्रदर्शनारियों पर चीन की सेना ने चार जून ही के दिन अंधाधुंध गोलियां चला कर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को मार डाला था. शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे इन प्रदर्शनकारीयों में ज़्यादातर विश्विद्यालयों के छात्र शामिल थे.

चीन की सरकार इन प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दे रही थी. महज़ एक दिन पहले ही उन्होंने कहा था "सामाजिक अस्थिरता" फैलाने वाले इन छात्रों के खिलाफ़ वो जो भी ज़रूरी लगेगा करेगी. पर किसी को ये उम्मीद नहीं थी की थ्यान आनमन चौक पर हर दिशा से सेना टैंको के साथ हमला कर देगी.

आम लोगों ने किसी तरह से लोगों को साईकिल रिक्शों पर लाद कर अस्पताल पहुंचाया.

चीन सरकार की इस कार्रवाई की कई देशों ने कड़ी निंदा की. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने चीनी क़दम की कड़ी भर्त्सना की. ब्रितानी प्रधानमंत्री मार्गरेट थ्रेचर ने कहा वो " हतप्रभ और सदमे में हैं."

2001 : नेपाल में ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह का राज्याभिषेक

Image caption महाराजा ज्ञानेंद्र दुनिया के अंतिम हिन्दू सम्राट थे

साल 2001 में जून चार ही के दिन ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह ने नेपाल की राज सत्ता संभाली थी.

ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह ने अपने बड़े भाई बिरेन्द्र वीर बिक्रम शाह और उनके बेटे दीपेन्द्र वीर बिक्रम शाह की मौत के बाद सत्ता संभाली थी.

ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह क़रीब सात साल ही नेपाल के सम्राट रह पाए उसके बाद प्रजातंत्र के लिए हुए एक बड़े आंदोलन ने सत्ताच्युत कर दिया.

ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह नेपाल के राज सिंहासन के ऊपर दो बार आरुढ़ हुए थे. पहली बार क़रीब साढ़े तीन साल की उम्र में जब उनके दादा त्रिभुवन वीर बिक्रम शाह को परिवार के बाक़ी सदस्यों के साथ देश निकाला दे दिया गया था.

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