कौन हैं बाबा रामदेव

भारत सरकार से काले धन और भ्रष्टाचार पर कड़े कदम उठाने का दबाव बनाने के लिए आमरण अनशन तक करने को तैयार स्वामी रामदेव पहले भी किसी ना किसी बहाने से सुर्खियां बटोरते रहे हैं.

अपनी बात कहने के लिए उनके पास कई माध्यम हैं, योग शिविर, उनके डीवीडी, कैसेट, किताबें, इंटरनेट पर वीडियो और शायद इनमें से सबसे प्रभावशाली टेलिविज़न.

किसी सुबह तड़के अगर आप टीवी देखें तो भगवा कपड़े पहने योग शिक्षा देते हुए स्वामी रामदेव का सीधा या रिकॉर्डिड प्रसारण आसानी से किसी चैनल पर तो मिल ही जाएगा.

रामदेव का दावा है कि दुनियाभर में एक अरब से ज़्यादा लोग उनके योग कार्यक्रमों को देखते हैं. ज़ाहिर है क्योंकि उनके कार्यक्रम हिन्दी, अंग्रेज़ी, तमिल और तेलुगू भाषा में 22 भारतीय टेलीविज़न चैनलों के ज़रिए दुनिया भर के घर-घर में पहुंच गए हैं.

पिछले एक दशक में भारत और विश्व में योग को प्रचलित करने का श्रेय स्वामी रामदेव को ही दिया जाता है.

उनके लाखों अनुयायियों के साथ ही उनके अनेक आलोचक भी हैं जिसकी वजह उनकी ज़िन्दगी का वो पहलू है जो योग के आगे की कहानी बताता है.

योग शिक्षा या व्यापार?

रामदेव को एक सफल कॉरपोरेट व्यवसायी भी माना जाता है. योग शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए बनाया गया उनका पातंजलि योगपीठ दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा संस्थान है.

Image caption रामदेव का दावा है कि योग और उनकी दवाओं से अधिकतम बीमारियां ठीक की जा सकती हैं.

उन्होंने हरिद्वार में ही दिव्या फार्मेसी नाम की एशिया की सबसे बड़ी औषधियों की फैक्ट्री भी लगाई है. वहां दवाओं के अलावा जैविक तरीके से बनाई गई खाने-पीने की चीज़ें (आटा, बेसन, जैम, पिस्ता, दलिया, जूस, तेल, बिस्कुट, शर्बत इत्यादि) भी बिकती हैं.

उनकी वेबसाइट पर बांछपन, ऐसिडिटी, कैंसर, लिवर सिरोसिस, हेपिटाइटिस जैसी कई छोटी-बड़ी बिमारियों के लिए पैकेज और उनके दाम की पूरी जानकारी उप्लब्ध है.

वर्ष 2006 में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने स्वामी रामदेव पर आरोप लगाए थे कि उनके आश्रम में बन रही दवाओं में हड्डियों का चूरा मिलाया जा रहा है.

बाबा रामेदव ने इन आरोपों का खंडन किया था और राज्य स्तरीय जांच में उनकी दवाओं को क्लीनचिट भी दे दी गई थी.

वैसे इससे पहले भी वृंदा करात ने बाबा रामदेव पर उनकी फ़ार्मेसी से कई कामगारों को ग़ैर क़ानूनी ढंग से हटाने का आरोप लगाया था.

उस वक्त वर्ष 2005 में दिव्या फार्मेसी में काम करने वाले कई लोग न्यूनतम वेतन और अन्य अधिकारों की मांग कर रहे थे.

हाल में वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी कहा कि रामदेव योग गुरू कम बल्कि व्यवसायी ज़्यादा हैं क्योंकि उनके योग शिविरों में हर पंक्ति में बैठने का अलग दाम तय होता है.

साथ ही रामदेव पर अपने योग केन्द्र खोलने के लिए किसानों की ज़मीन ज़बरदस्ती लेने के आरोप भी हैं.

महत्वाकांक्षी राजनीतिज्ञ

हरिद्वार में अपना आश्रम बनाने वाले रामदेव का जन्म हरियाणा के एक गांव में हुआ था. स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने संस्कृत और योग शिक्षा में आगे की पढ़ाई की.

बताया जाता है कि शुरुआत में उन्होंने कई गुरुकुलों में योग सिखाया.

अब स्कॉटलैंड का एक द्वीप भी उनकी ट्रस्ट के नाम पर है. वो ब्रिटेन, अमरीका, जापान, चीन, वियतनाम और सीरिया जैसे देशों का दौरा भी कर चुके हैं.

Image caption जानकारों का मानना है कि रामदेव की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ने के पीछे एक बड़ी वजह मीडिया की बढ़ती पहुंच है.

ब्रिटेन में तो उन्हें महारानी एलिज़ाबेथ ने विशेष अतिथि के तौर पर चाय की दावत पर बुलाया था.

रामदेव को मिली ख्याति के इस सफर में कई राजनेताओं ने उनका साथ दिया, लेकिन उन्होंने कभी भी किसी एक पार्टी के साथ जुड़ने की बात नहीं की.

हालांकि उनकी विचारों से उन्हें हमेशा संघ परिवार का नज़दीकी समझा गया.

वर्ष 2009 में जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि समलैंगिकता कोई अपराध नहीं है तब रामदेव ने कहा था कि समलैंगिकता शर्मनाक है और इस फैसले से समाज में हिंसा को बढ़ावा मिलेगा.

इससे पहले रामदेव ने यौन शिक्षा को ग़लत बताते हुए सरकार को ये सुझाव दिया था कि वो योग शिक्षा पर ज़्यादा बल दें.

इसके अलावा भी रामदेव कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर काफी मुखर रहे हैं.

उन्होंने पैकेट में बंद खाने, कोल्ड ड्रिंक्स, उन्हें बनाने वाली मल्टीनैश्नल कंपनियों, कीटनाशक के इस्तेमाल, ग़ैरक़ानूनी खनन और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ कई बार अपना विरोध दर्ज़ किया है.

आखिरकार पिछले साल रामदेव ने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की.

उन्होंने दावा किया कि अगले लोकसभा चुनाव में वो सभी सीटों पर अपनी भारत स्वाभिमान पार्टी के उम्मीदवार उतारेंगे.

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