सीरिया में जुमे की नमाज़ के बाद तनाव

  • 3 जून 2011
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Image caption प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि सुरक्षा बलों के हमलों मे अब तक 30 से ज़्यादा बच्चे कथित तौर पर मारे गए हैं.

सीरिया के कई शहरों में जुमे की नमाज़ के बाद प्रदर्शनों की रिपोर्टें मिल रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मार्च में यह विरोध अभियान शुरु होने के बाद कथित तौर पर मारे गए 30 से ज़्यादा बच्चों की याद में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

सीरिया में विदोशी पत्रकारों को प्रवेश कती अनुमति नहीं दी गई है.

इसीलिए पड़ोसी देश लेबनान से हालात पर नज़र रखे हुए बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर का कहना था किप्रदर्शनकारी नमाज़ के बाद सड़कों पर निकल आए.

उनका कहना था कि नारे लगाते हुए लोग राष्ट्रपति बशर अल असद के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे.

अलग अलग दावे

सीरिया में हालांकि टेलिविज़न और प्रदर्शनकारियों की वैबसाइट्स पर प्रदर्शनों की रिपोर्टें हैं लेकिन, उनका ब्यौरा बिल्कुल अलग अलग है.

सरकारी टेलिविज़न का ये कहना है कि जुमे की नमाज़ के बाद कई शहरों में लोग छुटपुट तौर पर जमा देखे गए लेकिन बिना किसी गड़बड़ी के वे चले गए.

उधर प्रदर्शनकारियों की वैबसाइट्स पर ये लिखा गया है कि देश भर के कई शहरों में लोग भारी संख्या में विरोध के लिए जमा हुए.

बताया गया है कि केंद्रीय शहर हमा में 1 लाख से ज़्यादा लोगों ने सड़कों पर निकल कर सत्ता परिवर्तन की मांग की.

वैबसाइट पर ये भी कहा गया है कि दर्रा, दिएरएज़ोर औऱ होम्ज़ में हुई गोलीबारी में कुछ लोग हताहत हुए हैं.

इनके अलावा सीरिया के तीसरे सबसे बड़े शहर होम्ज़ और राजधानी दमिश्क के उपनगरों में भी भरी प्रदर्शनों की ख़बर प्रर्दर्शनकारियों की वैबसाइट पर लगाई गई है.

सीरिया के आज के सही हालात सामने आने में अभी और वक्त लगेगा लेकिन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब सीरिया पर लग गई है.

अंतर्राष्ट्रीय रुख़

गुरुवार को तुर्की में हुए सम्मेलन से सीरियाई विपक्षी गुट अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने में कामयाब हुए.

ग़ौर तलब है कि तुर्की सम्मेलन में सीरियाई विपक्ष ने राष्ट्रपति असद की ओर से बातचीत और क्षमादान की पेशकश को नामंज़ूर कर दिया था.

सीरियाई कंसुल्टेटिव काउंसिल यानि परामर्श समित के एक सदस्य मौल्हेम द्रौबी ने कहा है कि राष्ट्रपति को सत्ता छोड़नी ही होगी.

"हमने राष्ट्रपति बशर अल असद को ये पेशकश दी है कि वे तुरंत इस्तीफ़ा देकर सत्ता अपने सहायकों को सौंप दें, जिससे सीरिया की जनता अगले एक साल के अंदर अपनी लोकतांत्रिक सरकार बनाने की तैयारी कर सके. अगर यह पेशकश मंज़ूर नहीं है तो हम सीरिया में क्रांति करंगे और उन्हें जबरन सत्ता से हटाएंगे."

होम्स शहर के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने बीबीसी की अरबी सेवा को नाम गोपनीय रखने की शर्त पर ये ब्यौरा दिया, "तबलीसा रास्तान और पड़ोसी शहरों से ये जानकारी मिली है कि वहां पूरी तरह ब्लैक आउट है, शहरों की घेरेबंदी इतनी सख़्त है कि कोई पंछी भी वहां से गुज़र नहीं सकता. संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप है. दो दिन पहले रास्तान में हेलिकॉप्टर घूमते देखे गए थे और पता चला कि वहां कुछ सैनिकों को पैराशूट से उतारा गय़ा है.रास्तान और तल्बीसा में आंधाधुंध बमबारी हो रही है."

उधर अमरीकी विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन पहले ही यह कह चुकी हैं कि राष्ट्रपति असद के पास ज़्यादा वक्त नहीं है.

उनका कहना था कि अमरीका सीरिया पर दबाव बनाने के लिए जितना ज़ोर लगा सकता था, लगा चुका है.

साथ ही उन्होंने इस बात पर अफ़सोस जताया कि संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग सीरिया विवाद पर उतना ध्यान नहीं दे रहे हैं जितनी ज़रूरत है.

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