इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों में अगर जून पांच के बारे में पढ़े तो पाएगें कि इसरायल ने मिस्र पर हमला कर दिया था और इसी दिन अमरीकी नेता रॉबर्ट कैनेडी की हत्या का प्रयास किया गया था.

1967 : इसरायल ने किया मिस्र पर हमला

Image caption मिस्र पर सफल हमले के बाद खुश इसरायली सैनिक

आज ही के दिन इसरायल ने मिस्र पर हमला कर उसके करीब चार सौ लड़ाकू विमान नष्ट कर दिए.

युद्ध तो इसरायल मिस्र सीमा पर ही शुरू हुआ था लेकिन जल्द ही ये कई और अरब मुल्कों तक फैल गया. इसरायल का मानना था कि मिस्र उस पर हमले के लिए पहले से ही तैयार बैठा था.

इसरायली हमले के फ़ौरन बाद इसरायल की सीमा पर अरब मुल्कों की फौजों का जमावड़ा शुरू हो गया.

मई 27 को मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल नासिर घोषणा की थी " हमारा मूल उद्देशय इसरायल का विनाश है. अरब लोग युद्ध चाहते हैं."

मई के अंत में मिस्र ने जोर्डन के साथ एक समझौता किया जिसके तहत दोनों मुल्कों ने माना कि अगर एक मुल्क पर हमला हुआ तो दूसरा मुल्क उसे अपने ऊपर हमला मानेगा.

इसरायल का मानना था कि अगर उसे अपने शत्रुओं से पार पाना है तो उन्हें चौंकाना ही एक मात्र रास्ता है.

1968 : अमरीकी सांसद रॉबर्ट कैनेडी के ऊपर गोली चली

Image caption रॉबर्ट कैनेडी जॉन एफ़ कैनेडी के छोटे भाई थे

अमरीका के शहर लॉस एंजेलेस के एक होटल में मशहूर अमरीकी सांसद रॉबर्ट कैनडी के ऊपर जानलेवा हमला हुआ था.

रॉबर्ट कैनेडी पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी के छोटे भाई थे. जॉन एफ़ कैनेडी की हत्या 1963 में हुई थी.

रॉबर्ट कैनेडी अपनी मौत के वक़्त देश के अगले राष्ट्रपति के पद के लिए बेहद मज़बूत दावेदार माने जाते थे.

कैनेडी की हत्या एक फलस्तीनी मूल के आदमी ने की, जिसने हत्या के बाद चिल्लाना शुरू कर दिया कि उसने ये कदम अपने देश के लिए उठाया है. हत्यारे को मौके पर ही गिरफ़्तार कर लिया गया और उसे बाद में उम्र कैद की सज़ा हुई.

लेकिन हत्यारे को सज़ा सुनाये जाने के बाद तक हत्या के पीछे कुछ और ही लोगों के हाथ होने की बात पर शक किया जाता रहा.

1944 : रोम पर मित्र सेनाओं का कब्ज़ा

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Image caption रोम में मित्र सेनाओं का खूब स्वागत हुआ

द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी, इटली और जापान की नाज़ी तिकड़ी वाले देशों की राजधानियों में से मित्र सेनाओं के कब्ज़े में आने वाला पहला शहर रोम था.

जून पांच को करीब एक बजे तडके पहुँचने वाले मित्र सेनाओं का पहला सैनिक अमरीकी था.

बाद में इसी दिन सुबह सूरज निकलने के बाद जर्मन सेनाओं ने औपचारिक रूप से इस शहर से हटने की घोषणा की थी.

रोम वासियों ने सडकों पर उतर कर मित्र सेनाओं का पूरे ज़ोश से स्वागत किया. सड़कों के दोनों तरफ खड़े आम लोगों ने सैनिकों को फूल भेंट किये और उनके समर्थन में नारे लगाये.

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