इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों को पलटें तो छह जून के दिन ही स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना का ऑपरेशन ब्लूस्टार पूरा हुआ था और बिहार में रेल दुर्घटना में 800 लोगों की मौत हो गई थी.

1984: अमृतसर में हरिमंदिर साहब पर सैन्य कार्रवाई

Image caption भिंडरनवाले और उनके समर्थकों ने मार्च से स्वर्ण मंदिर पर कब्ज़ा किया हुआ था.

पंजाब में सिखों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल हरिमंदिर साहब को चरमपंथियों के कब्ज़े से मुक्त कराने के मक़सद से भारतीय सेना ने सैन्य कार्रवाई - ब्लूस्टार के तहत मंदिर परिसर में प्रवेश किया.

संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले के नेतृत्व में सशस्त्र चरमपंथियों ने इसका विरोध किया और भीषण संघर्ष के बाद सेना ने छह जून को मंदिर परिसर पर कब्ज़ा कर लिया.

भारत सरकार के श्वेतपत्र के अनुसार 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए. इसी श्वेतपत्र के अनुसार 493 चरमपंथी या आम नागरिक मारे गए, 86 घायल हुए और 1592 को गिरफ़्तार किया गया. लेकिन इन सब आँकड़ों को लेकर अब तक विवाद चल रहा है.

इस कार्रवाई के दौरान भीषण ख़ून-ख़राबा हुआ और अकाल तख़्त पूरी तरह तबाह हो गया. स्वर्ण मंदिर पर भी गोलियाँ चलीं कई सदियों में पहली बार वहाँ से छह, सात और आठ जून को पाठ नहीं हो पाया. ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सिख पुस्तकालय पूरी तरह से जल गया था.

लड़ाई में संत जरनैल सिंह भिंडरावाले की भी मौत हो गई.

सिख संगठनों का कहना है कि हज़ारों श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद थे और उनका दावा है कि मरने वाले निर्दोष लोगों की संख्या भी हज़ारों में है. इसका भारत सरकार खंडन करती आई है.

इस घटना से सिखों में ख़ासी नाराज़गी पैदा हुई और चरमपंथियों ने इसके बाद तत्कालीन सेनाध्यक्ष एएस वैद्या की रिटायरमेंट के बाद हत्या कर दी.

ऑपरेशन ब्लूस्टार का आदेश देने वाली तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्तूबर 1984 की उन्हीं के दो सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी. इसके लगभग दस साल बाद तक पंजाब हिंसा का दौर चलता रहा.

1981: बिहार के ट्रेन हादसे में करीब 800 की मौत

छह जून 1981 को बिहार की बाघमती नदी में एक ट्रेन गिर गई जिससे उसमें सवार 1000 लोगों में से क़रीब 800 की मौत हो गई.

इस दुर्घटना को भारत के सबसे बड़े रेल हादसों में गिना जाता है.

ये पैसेंजर ट्रेन मानसी से सहरसा जा रही थी जब इसके नौ में से सात डिब्बे नदी में गिर गए.

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक़ रेलवे ट्रैक पर एक गाय अचानक आ गई थी और उसे बचाने के लिए ड्राइवर ने ब्रेक लगाई. लेकिन तेज़ बारिश के चलते ट्रेक पर बहुत फिसलन थी और ट्रेन के डिब्बे पलट गए थे.

1966: अश्वेत मानवाधिकार कार्यकर्ता पर गोली चली

Image caption मेरिडिथ की पीठ और टांगों पर गोली लगी थी.

अमरीका के मिसिसिपी विश्वविद्यालय में रंगभेद के ख़िलाफ आवाज़ उठाने वाले पहले अश्वेत मानवाधिकार कार्यकर्ता, जेम्स मेरिडिथ पर एक व्यक्ति ने गोलियां चलाईं.

अश्वेत लोगों के दमन के ख़िलाफ़ 32 साल के मेरिडिथ अकेले ही मेम्फिस शहर से जैक्सन शहर तक पदयात्रा पर निकले थे जब छह जून 1966 को उन पर हमला हुआ.

मेरिडिथ ने 1961 में मिसिसिपी विश्वविद्यालय में दाखिले की अर्ज़ी दी लेकिन उनके अफ्रीकी-अमरीकी मूल के होने की वजह से इसे ख़ारिज कर दिया गया.

इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया. अदालत ने उनके हक़ में फ़ैसला सुनाते हुए विश्वविद्यालय को उन्हें दाख़िला देने को कहा.

इसके बावजूद उन्हें विश्वविद्यालय में घुसने नहीं दिया गया. हिंसक झड़पें हुईं जिसमें दो लोग मारे गए और सैंकड़ों घायल हुए.

आख़िरकार तत्कालीन राष्ट्रपति केनेडी के हस्तक्षेप पर ही उन्हें दाखिला मिल सका.

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