ई-कोलाई के 'स्रोत का पता चला'

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Image caption इससे पहले जर्मनी के अधिकारियों ने बैक्टीरिया के लिए स्पेन की सब्ज़ियों को दोषी ठहराया था

जर्मन अधिकारियों के अनुसार बहुत संभव है कि यूरोप में 22 लोगों की जान लेने वाले और दो हज़ार से अधिक लोगों को बीमार करने वाले घातक ई-कोलाई बैक्टीरिया का स्रोत सलाद के लिए तैयार अंकुरित बीन्स हो.

उत्तर पश्चिमी जर्मनी के राज्य लोवर सैक्सोनी के कृषि मंत्री ने कहा है कि महामारी से संबंधित विषयों पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने यूलज़ेन के एक फार्म में इस बैक्टीरिया का स्रोत ढूँढ़ लिया है.

इस फार्म में सलाद के लिए ब्रोकोली, मटर और मूंग सहित बहुत सी सब्ज़ियाँ उगाई जाती हैं और अंकुरित बीन्स तैयार किए जाते हैं.

मंत्री का कहना है कि इस फार्म को बंद कर दिया गया है और यहाँ के सारे उत्पादों को बाज़ार से वापस बुलवा लिया गया है.

हालांकि अभी अधिकृत रूप से ये पुष्टि नहीं हुई है कि इस फार्म में बैक्टीरिया मौजूद हैं.

बर्लिन में बीबीसी संवाददाता स्टीफ़न इवांस का कहना है कि मंत्री के इस बयान से जर्मनी को शर्मिंदगी महसूस हो रही होगी क्योंकि जब इस बैक्टीरिया का पता चला था तो अधिकारियों ने कहा था कि इसका स्रोत स्पेन के फार्म हैं.

सलाह

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Image caption पहले कहा गया था कि खीरा खाने से ये बैक्टीरिया फैल रहा है

यूरोप में इस बैक्टीरिया की वजह से 22 लोगों की मौत हो चुकी है और दो हज़ार से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं. जर्मनी में ही इस बैक्टीरिया से 2,150 लोग बीमार पड़ चुके हैं.

इनमें से बहुत से लोगों को ख़ून और गुर्दे से जुड़ी बीमारी हैमोलिटिक-यूरेमिक सिंड्रोम (एचयूएस) भी हो चुका है. इस बीमारी की वजह भी ई-कोलाई बैक्टीरिया ही है और ये जानलेवा साबित हो सकती है.

ज़्यादातर मामले उत्तरी जर्मनी के शहर हैम्बर्ग में पाए गए हैं.

लेकिन हाल ही में जर्मनी की यात्रा करने वाले कम से कम 12 देशों के नागरिकों में भी इस बैक्टीरिया के लक्षण पाए गए हैं.

हालांकि अभी ये सुनिश्चित होना बचा है कि जिस फ़ार्म के बारे में बात की जा रही है वहाँ बैक्टिरिया मौजूद है.

अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि फ़िलहाल खीरा, लेट्यूस और टमाटर नहीं खाना चाहिए.

नया घातक रूप

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Image caption ई-कोलाई को पहले घातक बैक्टीरिया नहीं माना जाता था

वैज्ञानिकों ने कहा है कि जर्मनी में जिस ई-कोलाई बैक्टीरिया का पता चला है वह इसकी नई प्रजाति है.

उनका कहना है कि इसकी वजह से घातक ख़ून और गुर्दे को प्रभावित करने वाली बीमारी हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम (एचयूएस) हो सकती है.

डॉक्टरों का कहना है कि हो सकता है कि बैक्टीरिया की इस नई प्रजाति में ज़्यादा लोगों को प्रभावित करने की क्षमता विकसित हो गई हो.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ई-कोलाई के इस घातक रूप का आज तक पता नहीं था.

वैज्ञानिकों का कहना है कि वैसे तो ई-कोलाई एक तरह का एक सामान्य बैक्टीरिया है जो इंसानों और मवेशियों के पेट में हमेशा रहता है.

इसके ज़्यादातर रूप हानिरहित हैं,लेकिन ई-कोलाई के कुछ बैक्टीरिया घातक हैं और वह पेट में मरोड़ और दस्त जैसे लक्षण पैदा करते हैं.

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