सीरिया में '120 सुरक्षाकर्मियों की मौत'

Image caption सीरिया में मार्च के महीने से ही सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं.

सीरिया के जिस्र अल शुगूर शहर में लोगों ने आशंका जताई है कि यदि अधिकारियों ने वहां जबरन नियंत्रण क़ायम करने की कोशिश की तो वहां भारी ख़ूनख़राबा हो सकता है.

प्रदर्शनकारियों की ओर से जारी एक फ़ेसबुक पन्ने पर दिए गए इस बयान में सोमवार को सुरक्षाकर्मियों की मौत की भर्त्सना की गई है और इसकी जांच की भी मांग की गई है.

सोमवार को सीरिया के सरकारी टेलीविज़न ने कहा था कि उत्तर-पूर्वी शहर जिस्र अल शुगूर में सैंकड़ों बंदूक़धारियों के साथ लड़ाई में 120 सुरक्षा सैनिक मारे गए हैं.

फ़ेसबुक पर सरकार विरोधी गुटों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यदि शहर पर नियंत्रण के लिए फ़ौजी टैंकों ने वहां प्रवेश किया तो भारी तादाद में लोगों की जान जाएगी और हज़ारों लोगों को शहर छोड़कर भागना होगा.

बयान में कहा गया है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और शहर में बंदूक़धारी गुटों की मौजूदगी की बात ग़लत है.

सुरक्षाकर्मियों की मौत

सोमवार को सरकारी टेलीविज़न ने कहा था कि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने कई जगह पर घात लगा कर हमले किए हैं.

इस ख़बर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई क्योंकि विदेशी पत्रकारों पर सीरिया में काफ़ी पाबंदियां हैं.

लेकिन यदि ये सच साबित होता है तो मार्च में शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद ये सुरक्षा बलों पर सबसे बड़ा हमला है.

ख़बरों के अनुसार 20 पुलिसकर्मी हथियारबंद गुटों की ओर से घात लगा कर किए गए हमले में मारे गए वहीं दर्जनों सुरक्षाकर्मी शहर के अंदर बंदूक़धारियों का निशाना बने.

नरसंहार

सरकारी टेलीविज़न इसे “नरसंहार” का नाम दे रहा है.

सीरिया के गृह मंत्री इब्राहिम शार ने कहा है कि सरकार इस हमले का “निर्णायक तरीक़े” से जवाब देगी.

सरकारी टेलीविज़न का कहना है कि जिस्र अल शुगूर के कई हिस्सों पर बंदूक़धारियों ने क़ब्ज़ा कर लिया है और वो सरकारी इमारतों पर हमले कर रहे हैं, उन्हें आग लगा रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि पुलिसकर्मी आम नागरिकों को बचाने के लिए जा रहे थे जब उनपर घात लगाकर हमला किया गया.

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Image caption राष्ट्रपति बशर अल असद ने सुधारों का वादा किया है लेकिन प्रदर्शन फिर भी नहीं रूके हैं.

कम से कम 37 सुरक्षाकर्मी शहर के बीच बने सुरक्षा केंद्र पर हुए हमले में मारे गए और आठ एक पोस्ट ऑफ़िस पर हुए बम हमले में.

सना समाचार एजेंसी ने एक अधिकारी के हवाले से कहा है कि सुरक्षा बल उन घरों के इर्द-गिर्द घेरा डाल रहे हैं जहां से बंदूक़धारी गोली चला रहे हैं.

आरोप-प्रत्यारोप

अधिकारी का कहना था कि बंदूक़धारी आम नागिरकों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं.

बीबीसी के जिम मुईर का कहना है कि यदि सरकारी रिपोर्ट सही हैं तो जन असंतोष को रोकने की सरकार की कोशिशों के ख़िलाफ़ ये सबसे गंभीर क़दम है.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी की अरबी सेवा को बताया कि प्रदर्शनकारियों के पास हथियार नहीं हैं.

उनका कहना था कि जो भी पुलिसकर्मी मारे गए हैं उन्हें सुरक्षा से जुड़े तत्वों ने ही पीठ में गोली मारी है.

एक विपक्षी वेबसाइट का कहना है कि सुरक्षा बलों के कुछ सदस्य प्रदर्शनकारियों के साथ हो लिए हैं.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का भी कहना है कि सरकारी टेलीविज़न की बात कुछ सही नहीं लगती क्योंकि अभी तक प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण रूप से प्रदर्शन करते रहे हैं.

सीरिया में बशर अल-असद सरकार के ख़िलाफ़ मार्च के महीने में डेरा शहर से विरोध प्रदर्शन शुरु हुए और कई अन्य शहरों में फैल गए. कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब तक 1,000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

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