आतंकवाद के ख़िलाफ़ नई रणनीति का एलान

  • 8 जून 2011
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Image caption नई रणनीति के तहत चरमपंथी विचारधारा को रोकने पर बल दिया जाएगा.

ब्रिटेन की गृह मंत्री ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक नई रणनीति पेश करते हुए कहा है कि करोड़ों डॉलर खर्च करने के बावजूद आतंकवाद विरोधी कार्यक्रम युवा मुसलमानों को हिंसा के रास्ते से नहीं हटा पाए हैं.

गृह मंत्री थेरेसा मे ने कहा है कि नई नीति के तहत विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और जेलों पर ख़ासतौर पर ध्यान दिया जाएगा जिससे चरमपंथी सोच को बढ़ावा देने वाली ताक़तों को रोका जा सके.

विश्वविद्यालयों पर पैनी नज़र रखी जाएगी और सरकार स्कूलों, लाईब्रेरी और कॉलेजों के कंप्यूटरों पर भी ग़ैर-क़ानूनी सामग्री देखने पर रोक लगाएगी.

इस के तहत सरकार ने 40 विश्वविद्यालयों की पहचान की है जहां “चरमपंथी सोच को बढ़ावा देने का माहौल है और आतंकवाद के लिए लोगों को भर्ती किया जाता है.”

पिछली सरकार की नीति की आलोचना करते हुए उन्होने कहा, “कई बार युवाओं को चरमपंथी प्रभाव क्षेत्र में आने से रोकने की कोशिशों के तहत उन्हीं संगठनों को अनुदान दिया गया जिन्हें रोका जाना चाहिए था.”

इस्लामी गुटों के ख़िलाफ़ कैमरन का कड़ा रूख

पिछली सरकार ने ब्रिटेन में 2005 में हुए चरमपंथी हमलों के बात “प्रीवेंट” या “रोक” नामक कार्यक्रम चलाया था जिसका मकसद आतंकवादी विचारधारा को ख़त्म करना था.

गृह मंत्री ने कहा है कि नई नीति के तहत ब्रिटेन के 25 शहरों को प्राथमिकता दी जाएगी. इनमें बर्मिंघम, लेस्टर, लूटन, मैनचेस्टर, लीड्स और लंदन के कई इलाके शामिल किए गए हैं.

Image caption गृह मंत्री ने पिछली सरकार के आतंकवाद विरोधी कार्यक्रमों की तीखी आलोचना की है.

उन्होंने कहा है कि वैसे सभी कट्टरपंथी गुटों को मदद बंद हो जाएगी जो ब्रितानी मूल्यों में विश्वास नहीं रखते हैं. इनमें ऐसे गुट भी होंगे जो हिंसा से नहीं जुड़े रहे हैं लेकिन चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं.

उनका कहना था कि आतंकवाद को बढ़ावा देना या उसे सहमति देना भी क़ानून की नज़र में अपराध होगा और चरमपंथियों को ब्रिटेन में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी.

जेलों पर ख़ासतौस से ध्यान दिया जाएगा क्योंकि सरकार का मानना है कि वहां से छूटकर आए कई आतंकवादियों की सोच में कोई बदलाव नहीं आता.

थेरेसा मे ने कहा कि अभी भी ब्रिटेन को सबसे ज़्यादा ख़तरा अल क़ायदा से है.

आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञों ने इस नीति का स्वागत किया है लेकिन कहा है कि ये इसकी सफलता पर कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी.

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