जापान में दोगुना हुआ परमाणु विकिरण

Image caption फ़ूकूशिमा परमाणु संयंत्र

जापान ने मार्च में आए भूकंप और सुनामी के एक हफ़्ते के दौरान फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र से हुए विकिरण का जो अनुमान लगाया था उसे बढ़ाकर दोगुने से ज़्यादा कर दिया है.

यह भी कहा गया है कि परमाणु संयंत्र में हुए मेल्टडाउन यानि तापमान बढ़ने से संयंत्र की मशीनों के पिघलने की रफ़्तार पहले के आकलन से कहीं ज़्यादा थी. हालांकि 1986 में चेर्नोबिल में हुए हादसे से जो परमाणु विकिरण हुआ था उसके मुक़ाबले फ़ुकुशिमा का संशोधित विकिरण केवल 15 फ़ीसदी ही है.

नया आकलन

फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र से हुए विकिरण के बारे में नया आकलन एक विशेषज्ञ समिति द्वारा शुरू की गई जांच में सामने आया है.

जापान की परमाणु और औद्योगिक सुरक्षा एजेंसी नीसा के मुताबिक पहले परमाणु विकिरण का आकलन 370,000 टेरा बेकेरल (परमाणु विकिरण को मापने की इकाई) किया गया था, लेकिन अब नए संशोधित अनुमान के मुताबिक ये आंकड़ा 770,000 टेराबेकेरल हो सकता है.

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Image caption भूकंप और सुनामी से प्रभावित हुआ संयंत्र

नीसा का ये भी कहना है कि सुनामी के संयंत्र को ठंडा करने के सिस्टम तक पहुंचने के 80 घंटे बाद रिएक्टर संख्या दो और 79 घंटे बाद रिएक्टर संख्या तीन 'मेल्टडाउन' की वजह से क्षतिग्रस्त हो गए थे.

परमाणु संयंत्र के ऑपरेटर ने इसके रिएक्टरों को जनवरी तक बंद करने की योजना बनाई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें थोड़ा ज़्यादा वक़्त भी लग सकता है.

जापान की परमाणु सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक़ रिएक्टर संख्या एक में भूकंप के पांच घंटे के भीतर ही पिघला हुआ परमाणु ईंधन संयंत्र के निचले हिस्से में पहुंच गया था जो कि पहले संयंत्र के ऑपरेटर टेपको द्वारा किए गए अनुमान से 10 घंटे पहले है.

आरोप

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Image caption 80 हज़ार लोग हटाए गए

बीबीसी के टोक्यो संवाददाता का कहना है कि पहले से ही आलोचनाओं का सामना कर रही जापान सरकार और फुकुशिमा संयंत्र के प्रचालकों पर जानकारी को सार्वजनिक करने में देरी करने के आरोप भी लग सकते हैं क्योंकि परमाणु संयंत्र में आए संकट के तीन महीने बाद विकिरण के नए अनुमान की जानकारी दी गई है.

इस बीच जापान के प्रमुख कैबिनेट सचिव यूकिओ एदानो ने कहा है कि परमाणु संयंत्र के आसपास के इलाकों को खाली कराने का दायरा और बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है.

संयंत्र के 20 किलोमीटर के दायरे में जाना क़ानूनन प्रतिबंधित है लेकिन मॉनिटरिंग से अनुमान लगाया गया है कि भूमि संरचना और हवा के बहाव के पैटर्न को देखते हुए कुछ और इलाक़ों में विकिरण फैल सकता है.

परमाणु संयंत्र के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले 80 हज़ार से ज़्यादा स्थानीय निवासियों को वहां से हटा दिया गया है.

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