घर छोड़कर भाग रहे हैं लोग

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Image caption सरकार का कहना है कि हथियार बंद गिरोहों ने पुलिस कर्मियों को मारा है

सीरिया के जस्र अल शुग़ूर शहर के निवासी घर छोड़ छोड़ कर भाग रहे हैं क्योंकि वहां सैनिक कार्रवाई होने का ख़तरा है.

सरकार का कहना है कि इस नगर में सुरक्षा बलों के 120 सदस्य मारे गए हैं और वो सशस्त्र गिरोहों से निपटने के लिए सख़्त क़दम उठाएगी.

सरकार के विरोधी कहते हैं कि ये स्पष्ट नहीं है कि ये सुरक्षाकर्मी कैसे मारे गए.

उनका कहना है कि राष्ट्रपति बशर अल असद की सत्ता के ख़िलाफ़ चल रहा विद्रोह शांतिपूर्ण है.

जस्र अल शुग़ूर के निवासियों ने फ़ेसबुक पर संदेश लगाए हैं कि उन्हे सामूहिक हत्याओं का डर है.

इन संदेशों में लोगों से शहर तक आने वाली सड़कों पर जले हुए टायर, पत्थर और पेड़ों के तने डालकर उन्हे अवरुद्ध करने को कहा गया है.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी की अरबी सेवा को बताया, “आज सेना ने होम्स और पूर्वी अरीहा इलाक़े से जस्र अल शुग़ूर की तरफ़ बढ़ना शुरु कर दिया है”.

“बहुत से लोग पलायन कर रहे हैं. कुछ तुर्की की ओर भागे हैं और कुछ देश के दूसरे इलाक़ों की तरफ़ निकल गए हैं. हमें बहुत डर है कि जस्र अल शुग़ूर में ख़ून ख़राबा होगा”.

'आतंकवादी नहीं'

दर्जनों लोग जो उत्तरी सीमा पार करके तुर्की पहुंचे थे उनका अस्पतालों में इलाज हो रहा है.

उनका कहना है कि वो सीरिया के बलों के साथ हुई झड़पों में ज़ख़्मी हुए हैं.

सोमवार को जस्र अल शुग़ूर के आस पास के इलाक़े से दूर संचार सम्पर्क काट दिए गए.

सीरिया की घटनाओं की ख़बर देने के लिए विदेशी पत्रकारों को भीतर आने की अनुमति नहीं है.

सीरिया के सरकारी टेलीविज़न ने कहा है कि शहर पर सैकड़ों बंदूकधारियों ने क़ब्ज़ा कर लिया है.

टेलीविज़न के अनुसार हथियारबंद गिरोहों ने पुलिस पर घात लगाकर हमला किया जिसमें 20 पुलिसकर्मी मार गए. अन्य 82 सैनिक तब मारे गए जब शहर के सुरक्षा मुख्यालय पर हमला हुआ और आठ एक डाकख़ाने पर हुए बम धमाके का शिकार हुए.

टेलीविज़न पर सड़को पर पड़े वर्दी पहले लोगों की फ़ुटेज दिखाई गई और कहा गया कि ये गिरोहों के हमले के शिकार हुए हैं.

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Image caption सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज़ होते जा रहे हैं.

लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों ने बीबीसी अरबी सेवा को बताया कि शहर में कोई हथियारबंद गिरोह नहीं हैं और ये सुरक्षा कर्मी इसलिए मारे गए क्योंकि ये दल बदल करना चाहते थे.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, "बहुत से सैनिकों ने आम नागरिकों के आगे आत्म समर्पण कर दिया और उनके साथ जा मिले इसलिए सेना ने उनकी हत्या कर दी".

"मैं अल्लाह की क़सम खाकर कहता हूं कि हम सब आम नागरिक हैं हम आतंकवादी नहीं हैं".

यूट्यूब पर वीडियो फ़ुटेज लगी है जिसमें बहुत से शव देखे जा सकते हैं जिन्हे सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए सैनिक बताया गया है.

ऐसे वीडियो भी हैं जिनमें मरे हुए या ज़ख़्मी आम नागरिक देखे जा सकते हैं.

अंतरराष्ट्रीय दबाव

फ़्रांस का कहना है कि वो संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद से दमिश्क की सरकार की भर्त्सना करने वाले प्रस्ताव पर मतदान कराने को कहेगा. हालांकि इस बात की संभावना है कि रूस अपने निषेधाधिकार का इस्तेमाल करेगा.

वॉशिंगटन में फ़्रांस के विदेशमंत्री एलेन युप्पे ने कहा कि अगर परिषद के सभी 15 सदस्यों का समर्थन हो तो रूस को भी मनाया जा सकता है.

इस प्रस्ताव को फ़्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और पुर्तगाल ने तैयार किया था.

इसमें राष्ट्रपति असद की सरकार के हाथों हो रही हिंसा की भर्त्सना की गई है और उनसे मांग की गई है कि मानवीय दलों को सीरिया के शहरों में आने दिया जाए.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा कि 'राष्ट्रपति असद अपनी वैधता खोते जा रहे हैं और उन्हे या तो सुधर जाना चाहिए या फिर पद से हट जाना चाहिए'.

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