गद्दाफ़ी के बलों का मिस्राता पर हमला

  • 9 जून 2011
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Image caption लीबिया के मिस्राता शहर पर करनल गद्दाफ़ी के बलों ने हमला किया

लीबिया के नेता कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी के वफा़दार सैनिकों ने विद्रोहियों के नियंत्रण वाले शहर मिस्राता पर हमला किया है.

मिस्राता में मौजूद बीबीसी के एक संवाददाता ने बताया कि रॉकेटों से हमला हुआ है.

विद्रोहियों के एक प्रवक्ता ने बताया कि उनके 12 लड़ाके मारे गए हैं.

फ़रवरी में जब से ये संघर्ष शुरु हुआ है तब से मिस्राता पर हुआ ये सबसे गंभीर हमला है.

इस समय स्थिति ये है कि पूर्वी लीबिया पर विद्रोहियों का क़ब्ज़ा है जबकि राजधानी त्रिपली सहित देश के पश्चिमी हिस्से पर कर्नल गद्दाफ़ी के बलों का नियंत्रण है.

विद्रोहियों के एक प्रवक्ता हसन अल मिस्राती ने रॉएटर समाचार एजेंसी को बताया कि, “गद्दाफ़ी के सैनिक मिस्राता पर तीन तरफ़ से गोलाबारी कर रहे हैं”.

“गद्दाफ़ी ने सब तरफ़ से हज़ारों सैनिकों को मिस्राता पर हमला करने भेजा है और वो शहर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं”.

मई के मध्य तक मिस्राता पर गहन बमबारी हुई थी लेकिन फिर गद्दाफ़ी के बलों को वहां से खदेड़ दिया गया.

नैटो की बैठक

इस बीच नैटो के महासचिव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वो गद्दाफ़ी के बाद के लीबिया के लिए तैयार रहे.

ब्रसल्स में हुई नैटो के प्रतिरक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद एंडर्स फ़ॉ रेसमुसैन ने पत्रकारों से कहा कि आगे की योजना बनाने का समय आ गया है.

उन्होने कहा कि पिछले नौ सप्ताह से चल रहा नैटो का हवाई अभियान आम नागरिकों की जान बचाने में बहुत सफल रहा है.

उन्होने कहा कि लीबिया में पूर्व में बेनगाज़ी और पश्चिम में मिस्राता तक, आम नागरिकों के क़त्लेआम को रोकने में नैटो ने बहुत अहम भूमिका निभाई है.

रेसमुसेन ने बताया कि इस बैठक में मंत्रियों में आम सहमति बनी कि कर्नल गद्दाफ़ी पर दबाव बनाए रखा जाए और जब तक आवश्यक हो सैनिक कार्रवाई जारी रखी जाए.

उन्होने कहा कि यह किसी को पता नहीं कि कर्नल गद्दाफ़ी से लीबिया को मुक्ति कब तक मिलेगी लेकिन नैटो के मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य के लिए तैयारियां शुरू करनी चाहिए क्योंकि नए प्रशासन के सामने क़ानून-व्यवस्था और मानवीय सहायता की विकट चुनौतियां होंगीं.

नैटो सैनिक कार्रवाई ख़त्म होने के बाद अपने लिए कोई बड़ी भूमिका नहीं देख रहा है और वह चाहता है कि जल्द से जल्द नई शासन व्यवस्था देश की ज़िम्मेदारी संभाल ले.

नैटो के महासचिव ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और बाक़ी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को लोकतांत्रिक व्यवस्था तक लीबिया को ले जाने में मदद करनी चाहिए.

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