सुरक्षा परिषद में सीरिया पर प्रस्ताव

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Image caption जस्र अल शुग़ूर में सैन्य दलों के हमले की तैयारियों में जुटे होने की खबरें हैं.

सीरिया में जारी हिंसा से बचने के लिए हज़ारों की संख्या में लोग देश छोड़कर तुर्की में दाखिल हो रहे हैं.

घर छोड़ने वालों में खासतौर पर जस्र अल शुग़ूर शहर के निवासी हैं क्योंकि वहां सैनिक कार्रवाई होने का ख़तरा है.

सरकार का कहना है कि इस नगर में सुरक्षा बलों के 120 सदस्य मारे गए हैं और वो सशस्त्र गिरोहों से निपटने के लिए सख़्त क़दम उठाएगी.

हालांकि सरकार के विरोधी कहते हैं कि ये स्पष्ट नहीं है कि ये सुरक्षाकर्मी कैसे मारे गए.

इस बीच तुर्की के प्रधानमंत्री रिसेप एरडोआन ने कहा है कि वो तुर्की में शरण ले रहे विस्थापितों के लिए देश की सीमाएं सील नहीं करेंगे.

तुर्की-सीरिया की सीमा पर मौजूद पर बीबीसी संवाददाता ओवेन बेनेट जोन्स के मुताबिक भारी संख्या में तुर्की एंबुलेंस सीरिया के घायल लोगों को लाती ले जाती देखी गईं.

जोन्स के मुताबिक सीरिया की सीमा पर कुछ तंबू भी देखे जा सकते हैं. ये उन लोगों के ठिकाने हैं जो सेना के डर से शहरों से भागकर यहां पहुंचे हैं.

तुर्की सरकार शरणार्थियों के मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहती और यही वजह है कि उसने पत्रकारों के साथ शरणार्थियों की बातचीत पर रोक लगा दी है.

तुर्की के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि दमिश्क को चाहिए कि इस मामले से एहतियात और धैर्य से निपटे.

सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव

इस बीच ब्रिटेन और फ्रांस ने कहा है कि वो सीरिया में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर बुधवार को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के सामने एक प्रस्ताव रखेंगे.

इस प्रस्ताव को फ़्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और पुर्तगाल ने तैयार किया था.

इसमें राष्ट्रपति असद की सरकार के हाथों हो रही हिंसा की भर्त्सना की गई है और उनसे मांग की गई है कि मानवीय दलों को सीरिया के शहरों में आने दिया जाए.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा कि 'राष्ट्रपति असद अपनी वैधता खोते जा रहे हैं और उन्हे या तो सुधर जाना चाहिए या फिर पद से हट जाना चाहिए'.

इस प्रस्ताव में सीरिया पर प्रतिबंध या सैनिक कार्रवाई की बात नहीं है.

ब्रिटेन और फ्रांस पहले भी सीरिया में जारी हिंसा की निंदा कर चुके हैं और इस ब्रिटेन का कहना है कि अगर कोई भी देश इस प्रस्ताव पर वीटो करता है तो यह उसकी अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी होगी.

फ्रांस भी कह चुका है कि सीरिया में जारी हालात के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र का इस मुद्दे पर चुप रहना वाजिब नहीं होगा.

ग़ौरतलब है कि रुस सीरिया के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित किए जाने का विरोध कर चुका है.

इस बीच जस्र अल शुग़ूर के नज़दीक लेबनान में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम मुईर के मुताबिक फिलहाल शहर में कोई सैनिक कार्रवाई नहीं हुई है लेकिन सैन्य दलों के तैयारियों में जुटे होने की खबरें हैं.

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