कौवे से शातिर हैं चिंपांज़ी

चिंपांज़ी

चिंपांज़ियों के व्यक्तित्व का एक और पहलू सामने आया है.

पत्रिका प्लोस वन में छपे एक शोध के अनुसार चिपांज़ी एक प्रचीन कहानी की गुत्थी सुलझाने में सफल रहे हैं.

बीबीसी की विज्ञान मामलों की संवाददाता रेबेका मोरेल ने और ब्यौरा भेजा है.

एसेप्स की दो हज़ार पुरानी कहानी में एक प्यासे कौवे की कहानी है. प्यासे कौवे को एक घड़े से पानी पीना था लेकिन पानी बिल्कुल तल में था जहां पर कौवे की चोंच पंहुच नहीं पा रही थी.

लेकिन बिना हार माने कौवे ने इसका तोड़ ढ़ूंढ निकाला. तोड़ ये था कि उसने कुछ कंकड़ घड़े में डाला जिससे पानी का स्तर उपर उठ गया और उसने अपनी प्यास बुझा ली.

पर अब चिंपांज़ी ने भी उतनी ही अक़्लमंदी दिखाई है. वैज्ञानिको ने उन्हें एक उंचे गिलास में थोड़े से पानी में तैरती एक मूंगफली दे दी और उस मूंगफली को उन्हें निकालना था.

गिलास में पेशाब

चिंपाज़ियों ने इस समस्या से निपटने के लिए एक तरीक़ा निकाला. उन्होंने कहीं पास से पानी मुंह में भरकर इस गिलास में डाला जिससे की पानी का स्तर उपर उठ गया फिर वे मूंगफली तक पंहुच गए.

लेकिन एक चिंपांज़ी यहीं तक नहीं रूका. मुंह में पानी भरते-भरते वो इतना उकता गया कि उसने दरअसल उस गिलास के पानी के स्तर को तुरंत उपर उठाने के लिए उसमें पेशाब कर दिया ताकि मूंगफली फट से उसे मिल जाए.

जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट औफ़ इवोल्यूश्नरी एंथरोपोलोजी के शोधकर्ताओं ने बच्चों के सामने भी एक ऐसी समस्या रखी.

चार साल तक के बच्चे तो चिंपांज़ियों जैसे चतुर नहीं निकले लेकिन बड़े बच्चों ने समस्या सुलझाने के लिए बेहतर तरीक़ो की नुमाईश की.

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