तिब्बत से 'ग़ायब' भिक्षुओं पर सवाल

  • 9 जून 2011
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चीन ने संयुक्त राष्ट्र के इन दावों का खंडन किया है कि एक तिब्बती मठ से करीब 300 भिक्षुओं को शायद पिछले तीन महीनों से ग़ैर क़ानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्त हॉंग लाई ने कहा है कि कीर्ति मठ में कोई भी इस तरह से ग़ायब नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि स्थानीय अधिकारी कुछ भिक्षुओं को ‘क़ानूनी पढ़ाई’ के लिए ले गए थे.

मानवाधिकार गुटों के मुताबिक बौद्ध मठ तभी से बंद कर दिया गया है जब मार्च में एक भिक्षु ने ख़ुद को आग लगा ली थी.इस घटना के बाद सुरक्षाबलों और भिक्षुओं के बीच कई हफ़्तों तक टकराव की स्थिति रही थी.

प्रत्यक्षदर्शी और कार्यकर्ताओं का कहना है कि सैकड़ों भिक्षुओं को ग़ैर क़ानूनी तरीके से पकड़ कर रखा गया है.

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने चीन से पूछा था कि ये भिक्षु कहाँ हैं. संयुक्त राष्ट्र के एक बयान के मुताबिक, “हम ये आह्वान करते हैं कि इस तरह ज़बरदस्ती ग़ायब करने की बात की पूरी जाँच कराई जाए.”

एक पत्रकार वार्ता में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पत्रकारों को बताया कि मठ में ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा.

उनका कहना था, “कीर्ति मठ में धार्मिक नियम कायदे बनाए रखने के लिए स्थानीय अधिकारी भिक्षुओं को क़ानूनी जानकारी दे रहे हैं. ज़बरदस्ती ग़ायब करने का तो सवाल ही नहीं है. कुछ संगठनों को पूर्वाग्रह छोड़कर निष्पक्ष होना चाहिए.”

संगठनों का दावा है कि अर्धसैनिक बलों ने अप्रैल में अबा में मठ पर छापा मार 300 से ज़्यादा भिक्षुओं को हिरासत में ले लिया था.

टीकाकारों के मुताबिक अबा इलाक़े में तब से ही तनाव का माहौल रहा है जब तिब्बती समुदाय ने पश्चिमी चीन में तीन साल पहले प्रदर्शन किए थे.

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