सीरिया का मामला सुरक्षा परिषद भेजा गया

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अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने फ़ैसला किया है सीरिया के कथित गुप्त परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर वो सीरिया का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजेगा.

आईएईए में इस बात के पक्ष में मतदान हुआ. सीरिया में कथित रूप से एक अघोषित परमाणु रिएक्टर मौजूद होने के लिए सीरिया की आलोचना की गई है. ये ढाँचा इसराइल ने 2007 में नष्ट कर दिया था. सीरिया का दावा था कि ये एक ग़ैर परमाणु सैन्य परिसर था.

आईएईए का ये क़दम ऐसे समय आया है जब सीरिया में प्रदर्शनकारियों पर हुए हमलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दवाब बढ़ रहा है.

विएना में हुई आईएईए की बैठक में 17 देशों ने पक्ष में मतदान किया और छह ने विरोध किया जिसमें रूस और चीन शामिल थे. ये प्रस्ताव अमरीका और उसके सहयोगी पश्चिमी देशों ने रखा था.

बुधवार को यूरोपीय देशों ने भी एक अलग मसौदा सुरक्षा परिषद को सौंपा था जिसमें सीरियाई प्रशासन की निंदा की गई है.

परमाणु अप्रसार संधि

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Image caption सीरिया का ये ढाँचा इसराइल ने 2007 में नष्ट कर दिया था

कथित परमाणु रिएक्टर होने की बात की जाँच आईएईए ने जून 2008 में शुरु की थी लेकिन सीरिया ने सहयोग करने से मना कर दिया. एक बार को छोड़कर उसने संयुक्त राष्ट्र के जाँचकर्ताओं को स्थल पर जाने नहीं दिया.

एएफ़पी के मुताबिक अमरीकी राजदूत ग्लिन डेविस ने कहा, “गुप्त तरीके से एक अघोषित रिएक्टर बनाने की सीरिया की कोशिश दर्शाती है कि नियमों का उल्लंघन हुआ है. ये ढाँचा बनाने के पीछे क्या मंशा थी ये स्पष्ट है, वो रिएक्टर प्लूटोनियम तैयार करने के लिए बनाया गया था जिनका परमाणु हथियारों में इस्तेमाल हो सके.”

आईएईए में सीरिया के राजदूत ने एजेंसी की कार्यवाही को अफ़सोसजनक बताया है पर कहा है कि उनका देश अपनी बाध्यताओं को निभाएगा.

सीरिया ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए हुए हैं. इस वजह से सीरिया को अधिकार है कि वो आईएईए की निगरानी में बिजली बनाने के लिए ईंधन का संवर्धन कर सकता है.

लेकिन सीरिया ने आईएईए के साथ इस समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हुए हैं कि अगर वो नए परमाणु रिएक्टर की योजना बनाता है तो उसे आईएईए को सूचित करना होगा.

आख़िरी बार 2006 में आईएईए ने ईरान का मामला सुरक्षा परिषद को भेजा था. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास ये अधिकार है कि वो किसी देश पर पाबंदियाँ लगा सकता है. ईरान पर चार बार प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं.

हालांकि कूटनयिक मानते हैं कि सीरिया के साथ शायद ऐसा न हो क्योंकि रूस और चीन इसके ख़िलाफ़ हैं.

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