'तुरत फ़ुरत सज़ा' के लिए मोबाइल कोर्ट

इमेज कॉपीरइट Reuters

बांग्लादेश सरकार देश में हड़ताल के दौरान मोबाइल कोर्ट के इस्तेमाल के अपने फ़ैसले को बचाव कर रही है. इस मोबाइल कोर्ट का उपयोग देश में जारी विपक्ष की हड़ताल के दौरान लोगों को घटनास्थल पर ही जेल की सज़ा देने के लिए किया जा रहा है.

मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी ने रविवार से 36 घंटों की हड़ताल का आह्वान किया हुआ है. इस दौरान पुलिस और विपक्षी कार्यकर्ताओं की झड़पें हुई हैं. बीएनपी का कहना है कि करीब 50 कार्यकर्ताओं को मोबाइल कोर्ट ने जेल भेज दिया है.

गृह मंत्री शमशुल हक़ ने बीबीसी को बताया कि जो लोग क़ानून व्यवस्था के लिए ख़तरा हैं उन्हें सज़ा देने के लिए ये क़दम उठाना ज़रूरी है. लेकिन हड़ताल कर रहे विपक्षी नेताओं के मुताबिक ये अदालतें अभियुक्तों को अपना पक्ष रखने का ठीक से मौका भी नहीं दे रहीं.

बांग्लादेश में मोबाइल कोर्ट का इस्तेमाल आमतौर पर उन लोगों को सज़ा देने के लिए किया जाता है जो यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं, यौन प्रताड़ना के दोषी होते हैं या फिर खाद्यान्नों की कालाबाज़ारी करते हैं.

दुरुपयोग का ख़तरा

इस कोर्ट का मुखिया मजिस्ट्रेट होता है और पूरी टीम एक वैन या मिनी बस में घूमती है, कभी-कभी ये किसी इमारत से भी अपना काम चलाते हैं.

लेकिन बांग्लादेश में पहली बार रविवार को मोबाइल कोर्ट का इस्तेमाल उन लोगों के लिए हुआ जिन्हें सार्वजनीक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने या फिर पुलिस के काम में बाधा डालने का दोषी पाया गया.

मानवाधिकार कार्यकर्ता सुल्ताना कमाल कहती हैं कि राजनीतिक पार्टियाँ, ख़ासकर सत्ताधारी पार्टी, इस प्रणाली का दुरुयोग कर सकती हैं.

वे कहती हैं, “इस तरह लोगों को पकड़ कर उन्हें सज़ा देने में इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि लोगों के अधिकारों की रक्षा हो पाएगी.”

अवामी लीग के नेत़त्व वाली वर्तमान सरकार संविधान के उस प्रावधान में संशोधन करना चाहती है जिसके तहत सरकार को अपने कार्यकाल के अंत में सत्ता एक निष्पक्ष कार्यवाहक प्रशासन को सौंपना होती है जो चुनाव करवा सके.

विपक्षी पार्टी सरकार के इसी प्रस्ताव का विरोध कर रही है. इस हड़ताल की वजह से बांग्लादेश में जनजीवन ठप्प हो गया है. स्कूल, व्यापारिक संस्थान और कार्यालय बंद पड़े हैं.

सरकार का कहना है कि वो कार्यवाहक सरकार की व्यवस्था इसलिए ख़त्म करना चाहती है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे प्रशासन को ग़लत बताया है. सरकार ने कहा है कि वो विपक्ष से बात करने के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष ने ये प्रस्ताव ठुकरा दिया है.

संबंधित समाचार