हमले तेज़ करने की धमकी

  • 12 जून 2011
इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption माओवादियों ने धमकी दी कि सरकार दमन बंद करे नहीं तो और हमले होंगे

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने छत्तीसगढ़ में लगातार हो रहे हमलों की ज़िम्मेदारी लेते हुए धमकी दी है कि अगर सरकार आम लोगों पर हो रहे दमन को नहीं रोकती है तो इस तरह के हमले और होंगे.

छत्तीसगढ़ में हाल में हुए हमलों में सुरक्षा बलों के तीस से भी ज़्यादा जवान मारे गए हैं जिनमें एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भी शामिल हैं.

माओवादियों की दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी ने एक बयान जारी कर कहा है कि यह हमले प्रतिरोध स्वरूप किये गए हैं.

बयान में संगठन के प्रवक्ता गुड्सा उसेंडी का कहना है,"पिछले करीब दो सालों से जारी ‘ऑपरेशन ग्रीन हंट’ में सरकारी सशस्त्र बलों के हाथों जिनका घर जलाया गया, जिनके परिजन मारे गए, जिनका सब कुछ लूट लिया गया, जिनकी मां-बहनों के साथ अपमान हुआ, जिनके बच्चों को बर्बरता का शिकार होना पड़ा, जिनके प्रियजन जेल की काल कोठरियों में कैद हैं, ऐसे तमाम लोग इन जवाबी हमलों पर अपनी खुशी ज़ाहिर कर रहे हैं".

बयान में 17 मई को दंतेवाड़ा जिले के बोड़गुडेम के पास सीआरपीएफ़ के एक वाहन को बारूदी सुरंग से उड़ाने का भी उल्लेख किया गया है जिसमें कुल सात जवान मारे गए थे और एक घायल हुआ था.

इसी तरह 19 मई को महाराष्ट्र के गड़चिरोली ज़िले के नारगोंडा के पास जनमुक्ति छापामार सेना यानी पीएलजीए ने एक हमले में एक सी-60 कमाण्डो दस्ते के कमाण्डर चिन्ना वेंटा को मार गिराया था. इस हमले में दो माओवादी भी मारे गए थे.

इस घटना के बारे में उसेंडी का कहना है, "चिन्ना वेंटा आतंक का पर्याय था और गड़चिरोली ज़िले में शायद ही कोई गांव या कोई परिवार बचा होगा जो उसके अत्याचार का शिकार न हुआ हो. मारपीट से लेकर महिलाओं के साथ बलात्कार, फ़र्ज़ी मुठभेड़, लूटपाट, पैसाख़ोरी उसके रोज़मर्रा के काम थे."

23 मई को नक्सलबाड़ी विद्रोह की 44वीं वर्षगांठ के दिन पीएलजीए ने घात लगाकर गरियाबंद ज़िले के एएसपी राजेश पवार समेत नौ पुलिसवालों को उड़ीसा की सीमा के अंदर मार डाला था.

9 जून की घटना की चर्चा करते हुए माओवादियों का कहना है कि उस दिन सुबह के सात बजे पीएलजीए ने नारायणपुर ज़िले के झाराघाटी स्थित छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के कैम्प के नज़दीक पुलिस की एक टुकड़ी पर धावा बोला जिसमें पांच जवानों की मौत हुई. माओवादियों का आरोप है कि यह कैम्प ऑपरेशन ग्रीन हंट के दूसरे चरण के तहत हाल ही में खोला गया है.

अत्याचार का बदला

इन हमलों की चर्चा करते हुए गुड्सा उसेंडी का कहना है,"ऑपरेशन ग्रीन हंट के तहत अविभाजित बस्तर क्षेत्र में पुलिस, अर्धसैनिक, एसटीएफ, कोबरा, एसपीओ और कोया कमाण्डो के अत्याचार और ज़ुल्म बेहद बढ़ गए हैं.

"इसका एक ताज़ा उदाहरण है चिंतलनार इलाक़े के चार गांवों मोरपल्ली, तिम्मापुरम, पुलानपाड़ और ताड़िमेट्ला में सरकारी सशस्त्र बलों द्वारा मचाया गया आतंक".

उसेंडी ने कहा, “11 से 16 मार्च तक हुई उस बर्बर कार्रवाई में क़रीब 300 घरों को जला दिया गया, तीन ग्रामीणों की हत्या की गई, छह महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया, दो लोगों को लापता कर दिया गया और हजारों क्विंटल अनाज जला दिया गया. इस पूरे विध्वंस का सही आकलन करना नामुमकिन है".

संगठन का आरोप है कि 19 अप्रैल को नारायणपुर ज़िले के चिनारी गांव में चौदह साल के एक किशोर रजनू सलाम को पुलिस व अर्धसैनिक बलों ने गोली मार दी और घोषणा की कि वो मुठभेड़ में मारा गया.

यह भी आरोप हैं कि इससे पहले 23 मार्च को नारायणपुर ज़िले के ही कुल्लेनार में एक मुठभेड़ के बाद पीएलजीए के दो सदस्यों रमेश और प्रभाकर को जिंदा पकड़कर यातनाएं देने के बाद उसकी हत्या कर दी गई.

माओवादियों का कहना है कि हाल के "जवाबी हमलों" को इसी परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए.

माओवादियों ने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और एसपीओ से एक अपील भी की है.

इसमें कहा गया है, "अपील है कि आप हमारे दुश्मन नहीं है. यह लड़ाई आपके खिलाफ नहीं है. शोषक-लुटेरों ने आपके ज़रिए जनता के ख़िलाफ़ यह अन्यायपूर्ण युद्ध छेड़ दिया है.

"इसलिए आप जनता के ख़िलाफ़ हमलों और आतंकी कार्रवाइयों में भाग न लें. देश के असल दुश्मनों को पहचानें जो भ्रष्टाचारी, घोटालेबाज़, लूटख़ोर व दलाल शासक ख़ुद हैं".

संबंधित समाचार