सीरिया: सेना जिस्र अल शुगूर में घुसी

Image caption सीरिया में अभियान तेज़ हुआ

सीरिया से मिल रही ख़बरों के मुताबिक़ सेना और सरकार समर्थक लड़ाकों ने देश के उत्तर पश्चिमी शहर जिस्र अल शुगूर में अभियान तेज़ कर दिया है. सीरिया के राष्ट्रीय टेलिविज़न ने भी इसकी पुष्टि कर दी है.

सेना के साथ सफ़र कर रहे एक संवाददाता ने बताया कि बड़े पैमाने पर हो रही गोलीबारी के बीच सेना टैंकों की सुरक्षा में सुबह जिस्र अल शुग़ूर में दाख़िल हुई.

उन्होंने ये भी बताया कि सैनिक कई पत्रकारों को शहर के मुख्य अस्पताल में ले गए जहां उन्होंने कम से कम दो मृतकों को देखा.

ख़बर के मुताबिक़ सेना ने जिस्र अल शुग़ूर में बड़े पैमाने पर गोलीबारी की है और कई घरों को आग भी लगा दी गई है.

जिस्र अल शुगूर में अभियान की शुरुआत शुक्रवार सुरक्षा बल के जवानों पर हुए हमले के बाद हुई है जिसमें सरकार के मुताबिक़ 120 जवान मारे गए थे.

कई लोग हिंसा के बाद इलाके को छोड़ चुके हैं और हज़ारों लोग सीमा पार कर पड़ोसी देश तुर्की चले गए हैं.

सीरिया और तुर्की की सीमा पर मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जो लोग जिस्र अल शुगूर से पलायन कर रहे हैं उनके पीछे सीरियाई सेना फसल को आग लगा रही है और मवेशियों को मार रही है.

मानवीय संकट

Image caption तुर्की में तंबुओं में पनाह लिए सीरियाई

अमरीका ने कहा है कि उत्तरी सीरिया में जारी सैन्य अभियान की वजह से मानवीय संकट पैदा हो गए हैं.

व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने सीरिया की सरकार से नागरिकों के ख़िलाफ़ हिंसा ख़त्म करने और सहायता एजेंसियों को ज़रूरतमंद लोगों तक पहुंचने की इजाज़त देने की मांग की है.

इस बीच कई महीनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सरकार द्वारा चलाए अभियान से डर कर उत्तरी सीरिया से 4,000 से ज़्यादा लोग सीमा पार कर तुर्की चले गए हैं.

सहायताकर्मियों ने बीबीसी को बताया है कि सीमा पर हालात गंभीर हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मैन्स निबर्ग ने कहा, ''सबसे ज़्यादा मेडिकल मदद की ज़रूरत है. कई लोग ज़ख्मी हैं और तुर्की के इस सुदूर इलाके में अस्पताल की भी कमी है. लोगों को भोजन, कंबल, दरी और ज़्यादा बड़ी संख्या में तंबुओं की आवश्यकता है.''

सीरिया में शुक्रवार के साप्ताहिक नमाज़ के बाद से हुई हिंसा में अब तक 32 लोग मारे गए हैं.

अमरीका ने सीरिया की सरकार से हिंसा तुरंत रोकने और उत्तरी इलाकों में सहायता एजेंसी रेड क्रॉस को तुरंत पहुंच देने की मांग की है.

व्हाइट हाउस के एक बयान में कहा गया है,''अगर सीरियाई नेतृत्व सहायता एजेंसी को हिंसा प्रभावित इलाकों में जाने की इजाज़त नहीं देता तो एक बार फिर यही संदेश जाएगा कि उसे लोगों की कोई चिंता नहीं है.''

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख कैथरीन ऐश्टन ने प्रदर्शनकारियों पर बर्बरतापूर्ण फौजी कार्रवाई की निंदा की है जबकि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा है कि हिंसा में आम नागरिकों के मारे जाने को लेकर वो बेहद चिंतीत और दुखी हैं.

नागरिकों पर गोलीबारी

सीरिया से भागकर तुर्की पहुंचने वाले ज़्यादातर लोग जिस्र अल शुग़ूर के हैं जहां पिछले हफ़्ते 120 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे. स्थानीय लोगों का कहना है कि सैन्यकर्मी विद्रोह में मारे गए जबकि सरकार का कहना है कि सैनिक सशस्त्र गिरोह के हमलों में मारे गए.

सरकार का कहना है कि नागरिकों ने व्यवस्था क़ायम करने के लिए सैन्य हस्तक्षेप की मांग की थी लेकिन जिस्र अल शुग़ूर छोड़कर भागने वाले लोगों का कहना है कि सैनिक बाशिंदों पर गोलियां चला रहे हैं और घरों और फसलों को तबाह कर रहे हैं.

Image caption सीरिया की सीमा पार करने का इंतज़ार

राष्ट्रपति बशर अल असद के ख़िलाफ़ मार्च में शुरू हुआ प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुका है.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हिंसा में अब तक सैकड़ों लोग मारे गए हैं और ऐसी भी ख़बरें हैं कि सेना आम लोगों पर हवाई हमले कर रही है.

सीरिया ने बीबीसी समेत विदेशी पत्रकारों के देश में प्रवेश पर रोक लगा रखा है जिससे वहां से आ रही ख़बरों की सत्यता की जांच नहीं हो पा रही है.

तुर्की के अधिकारियों का कहना है कि कम से कम 4,300 लोग सीमा पार कर वहां पहुंचे हैं लेकिन बीबीसी संवाददाता ओवेन बेनेट जोन्स के मुताबिक़ शरणार्थियों की संख्या इससे भी ज़्यादा हो सकती है.

कई लोग ज़ख़्मी हालत में तुर्की पहुंच रहे हैं जबकि कुछ लोगों का कहना है कि वो सैनिक हैं जो देश छोड़कर भागे हैं.

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