युद्घ अपराधों की जांच की अपील

श्रीलंका कथित युद्ध अपराध(फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption श्रीलंकाई सेना पर युद्घ अपराध के आरोप पहले भी लगते रहे हैं.

एक टीवी चैनल पर श्रीलंका में तमिल युद्घ से जुड़ी एक डॉक्युमेंट्री फ़िल्म दिखाए जाने के बाद ब्रिटेन ने श्रीलंका से कहा है कि वो तमिल युद्घ के दौरान कथित युद्घ अपराधों की जांच करे.

ब्रिटेन के 'चैनल-फ़ोर' ने तमिल युद्घ के कुछ दृश्य दिखाए हैं और दावा किया है कि इससे पहले ये दृश्य किसी ने नहीं देखें हैं.

चैनल के अनुसार उन दृश्यों में श्रीलंकाई सेना को तमिल नागरिकों की ग़ैरक़ानूनी तरह से हत्या करते हुए दिखाया गया है.

श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि टीवी पर दिखाए गए वीडियो तोड़ मरोड़ कर बनाए गए हैं और इसका उद्देश्य श्रीलंकाई सेना को बदनाम करना है.

श्रीलंकाई सेना ने तमिल छापामारों को 2009 में पूरी तरह तबाह कर दिया था और इस तरह 25 साल से लड़ा जा रहा युद्घ समाप्त हुआ था.

इस संघर्ष के दौरान श्रीलंकाई सेना और तमिल छापामारों दोनों पर मानवाधिकार हनन के आरोप लगे हैं जिसमें लगभग एक लाथ लोग मारे गए थे.

'फ़िल्म'

'श्रीलंकास किलिंग फ़ील्ड' नामक फ़िल्म लगभग एक घंटे की है.

फ़िल्म में तमिल पुरूषों की हत्या करते हुए और तमिल महिलाओं की नग्न लाशों को दिखाया गया है. वीडियो देखने से लगता है कि तमिल महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न भी हुआ था.

टीवी चैनल के अनुसार लगभग दो साल की मेहनत से जमा किए गए वीडियो और चश्मदीदों के गवाह के आधार पर बनी फ़िल्म इस बात के सबूत हैं कि युद्घ के अंतिम महिनों में युद्घ अपराध किए गए थे.

एक वीडियो में एक महिला समेत तीन क़ैदियों की बहुत क़रीब से हत्या करते हुए दिखाया गया है.

उसी वीडियो में एक सैनिक को दूसरे सैनिकों से ये कहते हुए साफ़ सुना जा सकता है कि कैसे उन क़ैदियों की हत्या की जाए.

अपने साथियों को क़ैदियों के सिर में गोली मारने का निर्देश देते हुए एक सैनिक कह रहा था, ''क्या किसी में एक आतंकवादी को मारने की भी हिम्मत नहीं?''

चैनल-फ़ोर ने तमिल छापामारों के ज़रिए भी किए गए कथित युद्द अपराध को दिखाया है और चैनल का कहना है कि विशेषज्ञों ने वीडियो में किसी भी तरह के छेड़छाड़ के सबूत नहीं पाए हैं.

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Image caption तमिल छापामारों पर कामयाबी मिलने के बाद महिंदा राजपक्षे भारी मतों से दोबारा राष्ट्रपति चुने गए थे.

ब्रिटेन के विदेश उपमंत्री एलिस्टेयर बर्ट ने फ़िल्म पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''उन भयंकर दृश्यों को देखकर मुझे काफ़ी सदमा पहुंचा है. ये दृश्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों के हनन के विश्वसनीय सबूत हैं.''

एलिस्टेयर बर्ट ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई करने के लिए श्रीलंकाई सरकार पर दबाव बनाने के लिए ब्रिटेन अंतरराष्ट्रीय समुदाय का साथ देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

ब्रिटेन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिटेन का गृह मंत्रालय 40 तमिलों को श्रीलंका निर्वासित करने की तैयारी कर रहा है. उन 40 में से पांच तमिलों का आरोप है कि उनके दस्तावेज़ों को कोलंबो भेजने से उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.

'ख़ारिज'

लेकिन श्रीलंका ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है और उनका शुरू से यही कहना रहा है कि युद्घ के दौरान उनकी सेना ने किसी तमिल नागरिक की हत्या नहीं की है.

रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया है कि एक विशेषज्ञ ने वीडियो के साथ जान बूझकर छेड़छाड़ की बात कही है.

श्रीलंका सरकार ने हमेशा यही कहा है कि अनुचित ढंग से उसकी आलोचना की जाती है एक ऐसे संघर्ष को ख़त्म करने के लिए जिसमें हज़ारों लोग मारे गए थे.

पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष जांचकर्ता क्रिस्टौफ़ हिंस ने भी अपनी जांच में पाया था कि नागरिकों की हत्या करते हुए श्रीलंकाई सेना के वीडियो प्रामाणिक हैं.

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