पर्यटकों के लिए उत्तेजक विज्ञापन

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ट्यूनीशिया ने पर्यटकों को लुभाने के लिए शुरू हुए एक विवादित और उत्तेजक विज्ञापन अभियान को उचित ठहराया है. इस विज्ञापन का मकसद पर्यटकों को लुभाना है, जिन्होंने जनवरी में हुए विद्रोह के बाद यहाँ आना कम कर दिया है.

आजकल लंदन की बसों पर ट्यूनीशिया का एक विज्ञापन लगाया गया है, जिसमें एक महिला को मालिश कराते दिखाया गया है.

साथ ही इस विज्ञापन पर लिखा गया है- वे कहते हैं कि ट्यूनीशिया में कुछ लोगों के साथ सख़्त व्यवहार होता है.

पिछले साल दिसंबर में ट्यूनीशिया में विद्रोह शुरू हुआ था. इस विद्रोह के दौरान 200 लोग मारे गए थे. लेकिन इस कारण राष्ट्रपति ज़िना अल आबिदीन बेन अली का शासन ख़त्म हो गया था.

अहमियत

ट्यूनीशिया की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का अहम स्थान है. एक करोड़ से कुछ ज़्यादा की आबादी वाले ट्यूनीशिया में पर्यटन के क्षेत्र में चार लाख नौकरियाँ हैं और ये उद्योग अर्थव्यवस्था में ढाई अरब डॉलर का योगदान करता है.

ट्यूनीशिया के पर्टयन बोर्ड के लिए ये विज्ञापन तैयार करने वाली एजेंसी मेमैक ओगिलवी की सीरीन शेरिफ़ का कहना है कि इसका मकसद ब्रिटेन और अन्य देशों के पर्यटकों के लिए एक माहौल तैयार करना है.

बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "विचार ये था कि लोगों को उकसाया जाए, ताकि अरब देशों में चल रहे विद्रोह के संभावित ख़तरों पर ध्यान दिया जाए."

एक अन्य विज्ञापन में प्राचीन रोम के खंडहरों को दिखाया गया है और बगल में लिखा गया है- वे कहते हैं कि ट्यूनीशिया सिर्फ़ खंडहर रह गया है.

इनकार

सीरीन शेरिफ़ ने इससे इनकार किया कि ये विज्ञापन अभियान उन लोगों के प्रति असंवेदनशील है, जो जेल में हैं, प्रताड़ित किए गए हैं या जो बेन अली के 23 साल के शासन के दौरान मारे गए हैं.

उन्होंने कहा, "उन लोगों ने ग़लत व्यवहार किया जो तानाशाही में काम कर रहे थे. अब ट्यूनीशिया में तानाशाही नहीं है. अब ये ख़त्म हो चुका है. अब नया ट्यूनीशिया देखने को मिल रहा है. ये विज्ञापन अभियान विदेशियों के लिए है."

कई अरब देशों में विद्रोह हुए लेकिन ट्यूनीशिया पहला देश था, जो आम जनता के विद्रोह की चपेट में आया.

सेना का समर्थन गँवाने के बाद राष्ट्रपति बेन सऊदी अरब भाग गए थे.

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