इतिहास के पन्नों से..

इतिहास के पन्ने पलटें तो 20 जून के दिन यूरोप में नई मुद्रा का प्रस्ताव रखा गया था और गृह युद्ध से जूझ रहे लेबनान से करीब 300 पश्चिमी नागरिक बाहर निकाले गए थे.

1990: यूरोप में नई मुद्रा का प्रस्ताव

Image caption वर्ष 2002 में यूरोप में 12 देशों की राषट्रीय मुद्रा की जगह यूरोपिय मुद्रा 'यूरो' ने ले ली.

ब्रिटेन के तत्कालीन चांसलर जॉन मेजर ने 20 जून 1990 को पूरे यूरोप के लिए अलग-अलग राष्ट्रीय मुद्राओं के साथ एक नई मुद्रा का प्रस्ताव रखा.

मेजर ने इस नई मुद्रा का नाम 'हार्ड ईसीयू' यानि यूरोपियन करंसी यूनिट रखा. उनके मुताबिक शुरुआत में इसका इस्तेमाल व्यापार और पर्यटन में ही होना था. साथ ही इसकी देख-रेख के लिए एक अलग यूरोपिय मुद्रा कोष बनाया जाना था.

इससे पहले यूरोपिय आयोग के मुखिया जैक डेलोरिस ने पूरे युरोप के लिए एक मुद्रा और एक यूरोपिय बैंक का प्रस्ताव रखा था.

लेकिन ब्रितानी सरकार ने आयोग के प्रस्ताव के मुकाबले चांसलर जॉन मेजर के मॉडल को एक बेहतर विकल्प माना.

इससे कुछ दिन पहले ब्रितानी प्रधानमंत्री मार्ग्रेट थैचर ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि उनके जीवनकाल में यूरोप में एक मुद्रा अपनी ली जाएगी.

1976: लेबनान में अमरीकी राजदूत की हत्या के बाद 300 लोगों के निकाला

Image caption ब्रितानी दूतावास के प्रभारी जॉर्ज हैनकॉक ने सड़क रास्ते को असुरक्षित बताया.

लेबनन की राजधानी बेरूत से करीब 300 पश्चिमी नागरिकों को अमरीकी सेना की मदद से सीरिया पहुंचाया गया.

इन ब्रितानी और अमरीकी नागरिकों को सड़क के रास्ते ले जाना सुरक्षित नहीं होने की वजह से इन्हें अमरीकी नौसेना के एक जहाज़ में ले जाया गया.

लेबनान में अमरीका के राजदूत फ्रांसिस मेलॉय की हत्या के बाद अमरीका ने वहां रह रहे अपने नागरिकों को लेबनॉन छोड़ने की सलाह दी थी.

इन लोगों को पहले ब्रितानी सरकार की मदद से डमैस्कस ले जाने की योजना थी.

लेकिन दो दिनों तक सुरक्षा कारणों की वजह से ये लोग ब्रितानी दूतावास से नहीं निकल पाए. जिसके बाद अमरीकी नौसेना ने ऑपरेशन की कमान अपने हाथ में ले ली.

उस वक़्त लेबनान में एक साल से ज़्यादा से गृह युद्ध चल रहा था जो आखिरकार कि वर्ष 1990 में ख़त्म हुआ.

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