मस्जिदों में छिप रहे हैं गद्दाफ़ी: नेटो

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नेटो सुरक्षाबलों ने आरोप लगाया है कि गद्दाफ़ी और उनके सैनिक हमलों से बचने के लिए मस्जिदों में छिप रहे हैं और बच्चों के खेलने की जगहों में शरण ले रहे हैं. इस दौरान वो लीबिया के आम नागरिकों पर पूरी तैयारी के साथ घातक हमले करते हैं.

यह बयान लीबियाई सरकार के उस आरोप के जवाब में आया है कि नेटो सुरक्षाबल जानबूझकर आम नागरिकों के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं.

साथ ही नेटो ने यह भी माना है कि गुरुवार को लीबियाई सरकार के ठिकानों पर हवाई हमले के दौरान उसने गलती से विद्रोहियों के एक दल को निशाना बना दिया.

नेटो ने कहा है कि तेल संसाधनों के गढ़ बरेगा शहर में कर्नल गद्दाफ़ी के ठिकानों पर निशाना साधने के दौरान सुरक्षाबलों ने गलती से विद्रोहियों के सैन्य दल और टैंकों को निशाना बना दिया.

ये विद्रोही उस इलाके में मौजूद थे जहां गद्दाफ़ी समर्थक सैनिकों के मौजूद होने और सक्रिय होने की ख़बरें थीं.

नेटो के एक प्रवक्ता ने बताया कि विद्रोहियों की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक इस हमले में कुछ लोग घायल हुए हैं और लेकिन किसी की जान नहीं गई है.

'बातचीत नहीं करेंगे'

ग़ौरतलब है कि मार्च 2011 से अब तक नेटो की ओर से लीबिया में जारी हमलों की कार्रवाई के दौरान कई विद्रोही और आम नागरिक मारे जा चुके हैं.

इस बीच विद्रहोहियों ने बीबीसी के साथ बातचीत में इस बात से पूरी तरह इंकार किया है कि उनके और सरकार के बीच समझौते को लेकर किसी भी तरह की बातचीत हो रही है.

विद्रोहियों के एक प्रवक्ता का कहना है कि जब तक कर्नल गद्दाफ़ी या उनके परिवार का कोई भी सदस्य सत्ता में रहेगा तब तक उनसे कोई बात नहीं की जाएगी.

कुछ समय पहले लीबियाई सरकार ने कहा था कि विद्रोहियों के साथ बातचीत का दौर जारी है.

वहीं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून ने कहा है कि सुलह-समझौते के लिए उनकी ओर से नियुक्त किए गए प्रतिनिधित्व के ज़रिए बातचीत का माहौल ून रहा है.

'खत्म हो गए हैं पैसे'

विद्रोहियों ने यह भी कहा है कि पश्चिमी देश उन्हें आर्थिक मदद और संसाधन उपलब्ध कराने में कोताही कर रहे हैं और विद्रोहियों के पास अब पैसे खत्म होते जा रहे हैं.

विद्रोहियों की सरकार के एक मंत्री अली तरहॉनी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से कहा कि कर्नल गद्दाफ़ी के साथ लगातार जारी संघर्ष के चलते तेल का उत्पादन ठप्प पड़ गया है.

उन्होंने कहा कि विद्रोहियों के जल्द से जल्द आर्थिक मदद की ज़रूरत है लेकिन पश्चिमी देश या तो इस स्थिति को समझ नहीं या फिर उन्हें अब परवाह नहीं है.

हालांकि तरहॉनी ने कहा कि विद्रोही इस समस्या का हल ढूंढ लेगें और वो कई तेल कंपनियों से इस बाबत बात कर रहे हैं.

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