ओबामा के बाद सरकोज़ी ने फ़ौज वापसी का ऐलान किया

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अमरीकी राष्ट्रपति के एलान के बाद अब फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोज़ी ने भी अफ़गानिस्तान से अपने 4,000 सैनिकों की चरणबद्ध वापसी की घोषणा की है.

उनकी तरफ़ से जारी एक बयान के अनुसार फ्रांस भी सेना वापसी पर अमरीकी टाइमटेबल का अनुसरण करेगा.

राष्ट्रपति ओबामा ने इस साल के आख़िर तक 10,000 और सितंबर 2012 तक 23,000 सैनिक वापस बुलाने का एलान किया है.

अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने इस घोषणा का स्वागत किया है वहीं तालिबान ने इसे महज़ “दिखावा” कहते हुए तब तक लड़ाई जारी रखने का एलान किया है जब तक सभी विदेशी सैनिक देश से बाहर नहीं चले जाते.

राष्ट्रपति ओबामा की योजना के अनुसार 33,000 सैनिकों की वापसी के बाद 68,000 अमरीकी सैनिक अफ़गानिस्तान में रह जाएंगे. उनकी वापसी 2013 में तय है बशर्ते अफ़गान सैनिक देश की सुरक्षा का जिम्मा उठाने को तैयार हो जाएं.

लेकिन अमरीकी कटौती वहां के सैनिक कमांडरों के सुझाव से कहीं ज़्यादा और तेज़ है.

उन्होंने राष्ट्रपति से कहा है कि अब तक जो बढ़त मिली है सुरक्षा बलों को वो नाज़ुक है और पासा फिर से पलट सकता है इसलिए 2013 तक सैनिकों की तादाद में कमी नहीं की जाए.

Image caption एलान से पहले सरकोज़ी और ओबामा ने फ़ोन पर बात की.

संवाददाताओं का कहना है कि अफ़गानिस्तान में फ़ौज रखने का खर्च प्रति हफ़्ते दो अरब डॉलर से ज़्यादा है और अमरीकी कांग्रेस के कई सांसद इसकी आलोचना कर रहे हैं.

जनता भी एक ऐसे युद्ध से थक चुकी है जिसका अंत कहीं नज़र नहीं आता और जिसमें 1500 अमरीकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 12,000 घायल हुए हैं.

पासा पलट सकता है

काबुल से बीबीसी संवाददाता पॉल वुड का कहना है कि इस फ़ैसले से ओबामा ने फ़ौजी रणनीति पर असैनिक तंत्र का नियंत्रण जताया है.

फ़ौजी जनरल चाहते थे कि अभी कटौती नहीं की जाए.

पॉल वुड का कहना है कि ओबामा के एलान का मनोवैज्ञानिक असर भी होगा. लगभग 70,000 अमरीकी सैनिक रह जाएंगे लेकिन यदि अफ़गान नागरिकों को लगा कि अमरीका भागने का रास्ता तलाश रहा है तो कुछ तालिबान की ओर झुक सकते हैं.

वाशिंगटन से बीबीसी संवाददाता पॉल ऐडम्स का कहना है कि ओबामा का भाषण अमरीकी जनता को आश्वस्त करने की कोशिश थी कि “युद्ध का वेग” खत्म हो रहा है.

आनेवाले महीनों में 5,000 सैनिकों की वापसी होनी है और साल के अंत तक और पांच हज़ार वापस होंगे. तेईस हज़ार सितबंर 2012 से पहले आ जाएंगे यानि राष्ट्रपति चुनावों से ठीक पहले.

इस बात पर गंभीर संदेह है कि अफ़गान सैनिक सुरक्षा का भार उठा लेंगे लेकिन करज़ई ने वापसी के एलान का स्वागत किया है.

उन्होंने कहा,”ये एक अच्छा कदम है और अफ़गान लोगों की भलाई के लिए है. मैं चाहता हूं कि अफ़गानिस्तान के लोग अपने देश में सुरक्षित रहें और अपने दम पर सुरक्षित रहें.”

अफ़गान सुरक्षा

लेकिन बीबीसी से बात करते हुए कई वरिष्ठ अफ़गान सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि अभी न तो अफ़गान सेना और न ही अफ़गान पुलिस सुरक्षा का भार संभाल सकते हैं.

उन्होंने कहा कि इन संगठनों में दुश्मनों की घुसपैठ है, नशील दवाओं की लत है और भगोड़ेपन की बड़ी समस्या है.

वहीं एक अशांत इलाके के एक किसान ने बीबीसी को बताया: “जहां तक हमारा सवाल है, अमरीकी सैनिकों के रहने से मुझे या मेरे गांव को कोई फ़र्क नही पड़ता. अगर वो जाते हैं तो मुझ पर कोई असर नहीं होगा.”

उनका कहना था, “उन्होंने (अमरीकियों) ने चरमपंथियों का साथ दिया है, ऐसे कमांडरो को बढ़ावा दिया है जो हत्या करते हैं, बलात्कार करते हैं, लूटते हैं. इन सब कारणों से उन्हें हमारे गांव में नफ़रत से देखा जाता है.”

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