बान की मून फिर बने संयुक्त राष्ट्र महासचिव

  • 22 जून 2011
बान की मून इमेज कॉपीरइट Getty

संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव बान की मून दोबारा पांच साल के कार्यकाल के लिए निर्विरोध चुन लिए गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान में बान की मून के खि़लाफ़ कोई दूसरा उमीदवार नहीं था.

गत शुक्रवार को बान की मून के दूसरे कार्यकाल पर औपचारिक मुहर तब लग गई थी जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मतदान से पहले उनके दूसरे पांच साल के कार्यकाल को अनुमोदित कर दिया था.

बान की मून का दूसरा कार्यकाल 2012 से 2016 तक रहेगा. उन्होंने 2007 में संयुक्त राष्ट्र की कमान संभाली थी.

विश्लेषकों का मत है कि बड़े और विकसित देशों को लेकर बान की मून हमेशा से ज़्यादा उदार रहे हैं.

हालांकि जलवायु परिवर्तन और मध्य पूर्व में चल रही विरोध प्रदर्शनों की आंधी को लेकर बान की मून की नीतियों की प्रशंसा भी हुई है.

चयन पर ख़ुशी

दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने के बाद बान की मून ख़ुश दिखे और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में मौजूद राजनयिकों का झुक कर और मुस्कुरा कर अभिवादन भी किया.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष जोसफ डेएस ने बान की मून को संबोधित किया.

उन्होंने कहा, "एक उलझे हुए और मुश्किल अंतरराष्ट्रीय वातावरण में आपने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और उसके महात्व को अग्रणी रखा है. नए सुधारों के अलावा आपने नई योजनाओं की पहल की और हमेशा मानवाधिकारों के हित में काम किया है."

बान कि मून ने दो हफ़्ते पहले अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए कहा था कि उनकी प्राथमिकता संयुक्त राष्ट्र की मदद से 'दुनिया के देशों के बीच की दूरियों को कम करना रहेगी'.

संवाददाताओं का कहना है कि बान की मून जब पहली बार महासचिव बने थे तब सुरक्षा परिषद के शक्तिशाली देशों की प्राथमिकता थी कि 2003 के इराक़ युद्ध के बाद किसी गै़र राजनीतिक व्यक्ति को चुना जाए.

दक्षिण कोरिया के पूर्व विदेश मंत्री रह चुके बान की मून की धीमी रफ़्तार वाली नीतियों की भी आलोचना होती रही है.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चीन में हिरासत में रखे गए नोबेल पुरस्कार विजेता के मामले में बान की मून की चुप्पी पर ऐतराज़ भी जताया था.

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