निर्वासित राष्ट्रपति को 35 साल की सज़ा

  • 21 जून 2011
बेन अली और उनकी पत्नी इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption इस बात की उम्मीद बेहद कम है कि सऊदी अरब बेन अली और उनकी पत्नी के प्रत्यर्पण के लिए तैयार होगा.

ट्यूनीशिया की एक अदालत ने निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति ज़ैनल आबेदीन बिन अली और उनकी पत्नी को 35 साल कारावास की सज़ा सुनाई है.

पूर्व राष्ट्रपति बिन अली पर चोरी और ग़ैर कानूनी रुप से नकदी और ज़ेवरात अपने पास रखने का आरोप सिद्ध हुआ.

गौरतलब है कि 23 साल तक सत्ता में बने रहे राष्ट्रपति ज़ैनल आबेदीन बिन अली को इस्तीफ़ा देना पड़ा जब देश में फैले भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और मंहगाई के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शन उनके ख़िलाफ़ रैलियों में बदल गए.

बिन अली अपनी पत्नी के साथ देश छोड़ कर भाग गए थे. वो अब सऊदी अरब में रह रहे हैं.

पूर्व राष्ट्रपति और उनकी पत्नी पर छह करोड़ 50 लाख डॉलर से भी ज़्यादा का जुर्माना भी लगाया गया है.

इस फैसले को लेकर बीबीसी से हुई बातचीत में पूर्व राष्ट्रपति बिन अली के वकील ने कहा है कि यह फैसला राजनीति से प्रेरित है और वो इसे गंभीरता से नहीं लेते.

उन्होंने कहा कि बिन अली के देश छोड़ने के बाद बनी अंतरिम सरकार पर देश में स्थायित्व लाने का दवाब है और इस तरह के फैसलों के ज़रिए वो आम लोगों का इस मुद्दे से ध्यान भटकाना चाहती है.

तानाशाह और भ्रष्ट शासक

ट्यूनीशिया में मौजूद बीबीसी संवाददाता के मुताबिक इस बात की उम्मीद बेहद कम है कि सऊदी अरब बिन अली और उनकी पत्नी के प्रत्यर्पण के लिए तैयार होगा.

पूर्व राष्ट्रपति बिन अली पर गैर कानूनी रुप से नशीली दवाएं रखने का एक मुक़दमा भी चल रहा है जिस पर फैसला इस महीने के अंत तक आएगा.

ज़ैनल आबेदीन बिन अली पर हत्या के संदेह, सत्ता के दुरुपयोग, पुरातात्विक महत्व की चीज़ों की तस्करी और धांधली जैसे कई मामले चल रहे हैं.

बेरुत स्थित अपने वकील के ज़रिए बिन अली ने 23 साल के अपने शासन को लेकर कई तरह की दलीलें दीं. हालांकि ट्यूनीशिया के लोगों का मानना है कि पूर्व राष्ट्रपति एक तानाशाह और भ्रष्ट शासक थे जिन्होंने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया.

इस फैसले के बाद बिन अली के वकील की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ''वो चाहते हैं कि हर कोई इस बात को जाने और समझे कि यह आपराधिक मामला पूरी तरह से झूठा था. यह न्यायपालिका की ओर से सत्ताधारी सरकार को दिया गया एक लुभाने वाला फैसला है.''

बयान में यह भी कहा गया कि ट्यूनिशीया के लोग पूर्व राष्ट्रपति बिन अली की उपलब्धियों को न भूलें.

ट्यूनिशीया की तरह मिस्र में भी हुए जनांदोलनों के बाद सत्ता पर काबिज़ होस्नी मुबारक को पद छोड़ना पड़ा था. होस्नी मुबारक पर भी अलग-अलग आरोपों के तहत मामले चल रहे हैं.

संबंधित समाचार