जबरन काम कराने, यौन प्रताड़ना का आरोप

न्यूयॉर्क में स्थित भारतीय वाणिज्य दूत प्रभु दयाल और उनके परिवार के खिलाफ़ उनकी एक नौकरानी ने मुकदमा दायर किया है. संतोष भरद्वाज नामक इस नौकरानी ने आरोप लगाए हैं कि उनसे जबरन काम कराया जाता था, ग़ुलामों की तरह रखा जाता था और उनका यौन उत्पीड़न किया गया.

संतोष भरद्वाज ने न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है जिसमें प्रभु दयाल के साथ उनकी पत्नी चांदनी दयाल और बेटी अकांक्षा दयाल का नाम भी शामिल किया गया है.

अदालत में दाखिल दस्तावेज़ के मुताबिक संतोष भरद्वाज को दयाल परिवार ने अपने घर के काम करने के लिए एक दासी की तरह रखा था.

दस्तावेज़ में कहा गया है कि करीब एक साल तक दयाल परिवार ने संतोष को रोज़ाना, हफ़्ते के सातों दिन, करीब 15 घंटों तक घर का काम करने पर मजबूर किया और उसको पैसा भी बहुत कम दिया.

संतोष का कहना है, “काम के बदले मुझे हाथ में कोई पैसा नहीं दिया जाता था बल्कि भारत में मेरे बैंक खाते में महीने भर में कुल 300 डॉलर की दर से पैसे जमा करा दिए जाते थे, जो एक डॉलर प्रति घंटे की दर से भी कम है. सरकारी क़ानून के मुताबिक किसी को भी किसी भी प्रकार के काम के लिए साढ़े सात डॉलर प्रति घंटे की दर से मेहनताना दिया जाना ज़रूरी है. देर रात तक काम करने के बाद मुझे एक स्टोर रूम में ही सोने को कहा जाता था. औऱ किसी भी समय काम करने के लिए बुला लिया जाता था.”

अदालती दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि जब इस साल जनवरी महीने में संतोष ने भारत में अपने पति के ऑपरेशन के लिए कुछ पैसे मांगने की कोशिश की तो प्रभु दयाल ने कहा कि पहले वह उनकी टांगों की मालिश करे तो पैसा मिलेगा. औऱ इसी मांग को संतोष भरद्वाज ने यौन उत्पीड़न भी माना.

आरोपों से इनकार

वहीं समाचार एजेंसी पीटीआई ने प्रभु दयाल से हुई बातचीत के हवाले से लिखा है कि भारतीय वाणिज्य दूत सब आरोपों से इनकार करते हैं. प्रभु दयाल ने पीटाआई से कहा है, “सवाल ही नहीं उठता, मैने कभी मालिश के लिए नहीं कहा. संतोष को रहने के लिए हमने एक अलग कमरा दिया हुआ था जहाँ टीवी और फ़ोन भी था.”

संतोष का कहना है कि इस साल के शुरू में वह एक दिन मौका देखकर घर से भाग गई, जब प्रभु दयाल किसी मीटिंग में व्यस्त थे और उनकी पत्नी कमरे में सो रही थीं. और उसके भागने में कथित तौर पर एक सुरक्षा गार्ड ने भी मदद की थी.

भारतीय वाणिज्य दूत मैनहैटन में अपने परिवार के साथ भारतीय वाणिज्य दूतावास की ही उपरी मंज़िल पर रहते हैं.

45 वर्षीय संतोष भरद्वाज का कहना है कि दयाल परवार ने उसका पासपोर्ट भी छीन कर रख लिया था औऱ उसे कहीं बाहर नहीं जाने देते थे.

संतोष भरद्वाज कहती हैं, “मेरे साथ दयाल परिवार ने बहुत बुरा सुलूक किया. मैंने यह मुकदमा इसीलिए दायर किया है क्यूंकि मैं चाहती हूं कि मैंने इतने दिनों तक जो काम किया है उसका जायज़ मेहनताना मुझे मिले. और मुझे हरजाना भी दिया जाए. मैंने बहुत प्रताड़ना झेली है, मैं अपना पासपोर्ट भी वापस चाहती हूं.”

प्रभु दयाल सन 2008 से न्यू यॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूत हैं. संतोष भरद्वाज के अनुसार प्रभु दयाल उनको भारत से न्यूयॉर्क यह कह कर लाए थे कि वह उनके घर का काम काज करेगी और उसे उसके अच्छे पैसे भी मिलेंगे.

अदालती दस्तावेज़ के मुताबिक संतोष को 10 डॉलर प्रति घंटे की दर से पगार देने का वादा किया गया था. औऱ ओवरटाईम का पैसा अलग से देने का वादा किया था जिससे वह भारत में अपने पति और चार बच्चों के लिए पैसे भेज सके.

नौकरानी की वकील होलिस फ़िच का कहना है कि इस प्रकार के मामले काफ़ी आम हैं.

वह कहती हैं, “ इस प्रकार के मामलों में संतोष भारद्वाज अकेली नहीं हैं, बल्कि इस प्रकार घरेलू काम करने वालों और अन्य कर्मचारियों को डरा धमका कर मानसिक रूप से उन्हे काबू में करने के मामले काफ़ी आम हैं. और इस तरह इन लोगों से मुफ्त में काम करवाया जाता है.”

इससे पहले 2007 में भी न्यूयॉर्क में भारतीय मूल के एक दंपत्ति को दो महिलाओं से ग़ुलामी कराने का दोषी पाया गया था. न्यू यॉर्क में सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी मानना है कि घरेलू काम करने वालों के साथ अमानवीय व्यहवार के कई मामले सामने आए हैं लेकिन बहुत से अब भी सामने नहीं आए हैं.

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