बहरीन:आठ आंदोलनकारियों को उम्रक़ैद

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Image caption एक विशेष सुरक्षा अदालत में कुल 21 विपक्षी आंदोलनकारियों पर मुकदमा चलाया गया.

बहरीन की एक विशेष अदालत ने आठ विपक्षी शिया आंदोलनकारियों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.

राष्ट्रीय समाचार एजंसी (बीएनए) के मुताबिक इन्हें देशद्रोह के लिए दोषी पाया गया है.

इनमें प्रमुख हैं, मानवाधिकार कार्यकर्ता अब्दुलहादी-अल-ख्वाजा, शिया नेता अब्द-अल-जलील सिंगासे और हसन मुशायमा.

दोषी पाए गए अन्य 13 लोगों को दो साल से 15 साल की अलग-अलग मियादों सज़ा सुनाई गई है. बीएनए के मुताबिक 21 में से 14 आंदोलनकारी अदालत में पेश हुए और बाक़ि को उनकी ग़ैरमौजूदगी में ही सज़ा सुनाई गई.

फैसला सुनाए जाने से पहले शिया समर्थकों ने सड़कें जाम की और रैलियां निकालीं.

“विदेशी हाथ”

बहरीन में बहुसंख्यक समुदाय शिया है लेकिन शासन की बागडोर सुन्नी प्रशासकों के हाथ में है. शिया आंदोलनकारी लोकतांत्रिक सुधारों और अपने समुदाय के लिए ज़्यादा अधिकारों की मांग करते रहे हैं.

इन्हीं मांगों को उठाने के लिए इस वर्ष फरवरी और मार्च में बहरीन में ज़ोरदार प्रदर्शन हुए.उस दौरान आपातकाल तक लगाई गई जिसे एक जून को ही हटाया गया है.

बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक इस मामले में सज़ा के ऐलान के बाद प्रदर्शन दोबारा भड़क सकते हैं.

अधिकारियों का दावा है कि दोषी पाए गए लोगों ने “एक चरमपंथी गुट के ज़रिए बल प्रयोग कर” बहरीन के सुन्नी शासकों को हटाने की कोशिश की.

ये भी कहा गया है कि इस गुट ने किसी और देश की मदद ली. समझा जा रहा है कि यहां इशारा ईरान की ओर है. सरकार और उसके समर्थकों ने ईरान और लेबनॉन के चरमपंथी गुट हेज़बोल्लाह पर बहरीन में विरोध भड़काने का आरोप लगाया है.

इन प्रदर्शनों में 30 लोग मारे गए और कई प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए. अब उनपर मुकदमे चल रहे हैं.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अधिकारियों ने कई विरोधियों को प्रताड़ित किया और मनमाने तरीके से हिरासत में डाला.

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