सिंगूर मामले में टाटा पहुँचा अदालत

टाटा मोटर्स ने पश्चिम बंगाल सरकार के ख़िलाफ़ कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटकटाया है. सरकार ने कुछ दिन पहले सिंगूर से जुड़ा विधेयक पारित किया है जिसके तहत टाटा-सिंगूर समझौते को रद्द करते हुए ज़मीन किसानों को वापस दी जानी है.

मामले की सुनवाई कलकत्ता हाई कोर्ट में चल रही है. सिंगूर भूमि पुनर्वास और विकास विधेयक 14 जून को पश्चिम बंगाल विधानसभा में पारित किया गया था. बिल को राज्यपाल की मंज़ूरी भी मिल चुकी है.

किसानों को ज़मीन लौटाने के लिए राज्य सरकार ने पहले अध्यादेश के ज़रिए टाटा से ज़मीन वापस लेने की घोषणा की थी.

लेकिन अध्यादेश के संवैधानिक आधार पर निरस्त होने के बाद सरकार ने 24 जून से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र को पहले बुलाने का फ़ैसला लिया और ये विधेयक पेश किया.

क्या है विवाद

वाममोर्चे की सरकार के कार्यकाल में टाटा समूह के साथ समझौता हुआ था जिसके तहत टाटा को सिंगूर में अपना संयंत्र लगाना था और उसके लिए उसे भूमि आवंटित की गई थी. पश्चिम बंगाल सरकार ने एक हज़ार एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण करके उसे टाटा मोर्टस को सौंप था जहाँ वह एक लाख रूपए मूल्य वाली 'जनता कार' का उत्पादन करने वाली थी.

लेकिन भूमि आवंटन को लेकर टाटा समूह को लोगों का ज़बरदस्त विरोध झेलना पड़ा था. योजना का विरोध करने वालों का कहना था कि सिंगूर में चावल की बहुत अच्छी खेती होती है और वहाँ के किसानों को इस परियोजना की वजह से विस्थापित होना पड़ा है.इसे लेकर हिंसक प्रदर्शन भी हुए थे.

आख़िरकर 2008 में टाटासमूह ने सिंगूर स्थित अपने संयंत्र को पश्चिम बंगाल से हटाने का फ़ैसला किया था.

ममता बनर्जी ने 2011 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सिंगूर को एक बड़ा मुद्दा बनाया था. सिंगूर में टाटा मोटर्स का काम जनवरी 2007 में शुरु हुआ था. पश्चिम बंगाल में हिंदुस्तान मोटर्स के बाद ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में यह दूसरा बड़ा निवेश था.

संबंधित समाचार