समस्याओं से जूझ रही कोरियाई पॉप इंडस्ट्री

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दक्षिण कोरिया की पॉप इंडस्ट्री एशिया के बड़े व्यवसायों में से एक है.

कोरियाई पॉप इंडस्ट्री की नज़र यूँ तो ब्रिटेन और अमरीका की पॉप इंडस्ट्री पर है लेकिन जिस तरह से ये इंडस्ट्री अपने कलाकारों के साथ व्यवहार करती है उसमें क्या वह कोई चुनौती खड़ा कर सकेगी?

किसी एक पॉप स्टार के लिए सिर्फ़ ख़ुद का प्रचार करके पैसा बनाने की ज़्यादा संभावना नहीं है. इसलिए ज़्यादातर कलाकार घूम-घूमकर प्रोग्राम करना और अपने नाम की सामग्री बेचना ज़्यादा फ़ायदे का सौदा दिखने लगा है. इसलिए जब भी कंसर्ट की बारी आती है जो आकार का बड़ा महत्व होता है.

इसलिए कोरियाई पॉप कैलेंडर के सबसे बड़े प्रोग्राम का नाम है 'द ड्रीम कंसर्ट'. इसमें 20 बैंड्स भाग ले रहे हैं और ये सियोल के एक वर्ल्ड कप स्टेडियम में होगा जहाँ 66,800 लोगों के बैठने की जगह है.

हर साल एक बार ये वो समय होता है जब नौजवानों का प्रेम ज़ाहिर होता है. रंगीन गुब्बारों से लोग अपनी प्रतिबद्धता ज़ाहिर करते हैं.

ज़्यादातर बैंड्स, जैसे सुपर जूनियर और वंडर गर्ल्स घर-घर पहचाने जाते हैं. आकर्षक धुनों पर सतही नृत्य के ज़रिए युवा लड़के और लड़कियाँ लोगों को लुभाते हैं.

बड़ी इंडस्ट्री

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Image caption रेन को उनके प्रशंसकों की वजह से टाइम पत्रिका के प्रभावशाली लोगों की सूची में जगह मिली थी

कोरियाई पॉप इंडस्ट्री एक बड़ी इंडस्ट्री है. वर्ष 2009 में ही इसने तीन करोड़ डॉलर का व्यवसाय किया था और एक सरकारी वेबसाइट के अनुसार पिछले साल ये आंकड़ा दोगुना हो गया था.

बड़ी कोरियाई कंपनियाँ महत्वाकांक्षी भी हैं और इसके कलाकार जापान, अमरीका और यूरोप की ओर क़दम बढ़ा रहे हैं.

दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी प्रोडक्शन कंपनी एसएम एंटरटेनमेंट ने एक साल का वर्ल्ड टूर का प्रोग्राम बनाया है और वह अगले महीने पैरिस में शो के ज़रिए यूरोप में अपना पहले कंसर्ट कर रही है.

पिछले अप्रैल में ही कोरिया के पॉप किंग जंग जी-हून रेन को टाइम पत्रिका के पाठकों ने साल से सबसे प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में चुना था.

इससे पहले साल के शुरु में बिग बैंग बैंड ने अमरीकी आईट्यून में टॉप टेन में जगह बनाई थी.

कोरिया को लगता है कि पॉप इंडस्ट्री के ज़रिए देश की छवि और अर्थव्यवस्था दोनों को सहायता मिलेगी.

सच

लेकिन इस इंडस्ट्री का एक और पहलू है जो कम आकर्षक है.

इसमें इंडस्ट्री और उन नए कलाकारों के बीच विवाद हैं, क़ानूनी दाँवपेंच का इतिहास है, जो अभी भी अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं.

कोरियाई पॉप इंडस्ट्री की कई बड़ी सफलताओं की कहानी कथित बंधुआ-अनुबंधों के आधार पर लिखी गई है, जिसमें इसके प्रशिक्षु स्टार्स के साथ लंबे समय के अनुबंध किए जाते रहे हैं जिसमें उसके हाथ में न तो अपना भविष्य होता है और न ज़्यादा पैसे ही मिलते हैं.

वहां के सबसे सफल ग्रुप में से एक 'डॉन्ग बैंग शिन की' दो साल पहले अपने प्रबंधन कंपनी के ख़िलाफ़ अदालत पहुँची थी. उनका कहना था कि कंपनी के साथ उनका 13 साल का अनुबंध बहुत लंबा अनुबंध है, इसमें बहुत से प्रतिबंध हैं और उन्हें सफलता से होने वाले लाभ से बहुत थोड़ा सा ही हिस्सा मिल रहा है.

अदालत ने इस ग्रुप का साथ दिया और उसके फ़ैसले की वजह से फ़ेयर ट्रेड कमीशन को'मॉडल कॉन्ट्रैक्ट' जारी करना पड़ा जिससे कि कलाकारों और उनके प्रबंधन कंपनियों के बीच बेहतर अनुबंध हो सके.

इंडस्ट्री के अंदर के लोग कहते हैं कि विदेशों में मिल रही सफलता और विदेशी म्यूज़िक कंपनियों के साथ हुए अनुबंधों ने भी इस परिवर्तन के लिए बाध्य किया है.

सैंग ह्यूक इम एक एंटरटेनमेंट वकील हैं जो म्यूज़िक कंपनियों और कलाकारों दोनों के मुक़दमे लड़ते हैं. वे कहते हैं, "हाल के समय तक एशिया में ज़्यादा मोलभाव की संस्कृति नहीं थी, ख़ासकर तब जब आप इस इंडस्ट्री में नए हैं."

उनका कहना है कि अब रवैया बदल रहा है लेकिन कुछ चीज़ें हैं जिसे न तो कॉन्ट्रैक्ट बदल सकता है और न रवैया.

निराशा

उदाहरण के तौर पर रेनबो सात लड़कियों का एक बैंड है. इसमें हर लड़की का नाम एक रंग के आधार पर रखा गया है और वे बहुत सफल हैं.

लेकिन रेनबो का अपनी कंपनी डीएसपी के साथ सात साल का अनुबंध है. उनका कहना है कि दो साल से कई-कई घंटों तक काम करने के बावजूद उन्हें इतना कम पैसा मिलता है कि उनके परिजन निराश हैं.

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Image caption रेनबो की लड़कियों को हर दिन कई घंटे काम करना पड़ता है

डीएसपी के एक निदेशक कहते हैं कि वे ग्रुप के साथ लाभांश बाँटते हैं लेकिन वे ये भी स्वीकार करते हैं कि कंपनी का खर्च काटने के बाद कलाकारों के लिए बहुत कम बचता है.

ये बात सही है कि बड़े ग्रुप होने की वजह से कोरियाई पॉप खर्चीला भी बहुत है.

मैनेजरों की टीम रखनी होती है, कोरियोग्राफ़र चाहिए होते हैं और फिर वॉर्डरोब मैनेजर चाहिए होते हैं. इसके अलावा कई वर्षों का गायन का अभ्यास, नृत्य का प्रशिक्षण और रहने खाने की व्यवस्था है.

कंपनी के लोग कहते हैं कि ये खर्च अक्सर लाखों में पहुँचता है.

लेकिन म्यूज़िक सेल्स से ये खर्च निकाला नहीं जा सकता. इसकी एक वजह तो ये है कि वहाँ म्यूज़िक सीडी बहुत सस्ते हैं. म्यूज़िक साइट्स पर भी एक गानों के लिए कुछ सेंट ही चार्ज किए जाते हैं.

म्यूज़िक डिस्ट्रीब्यूटर बेर्नी चो इस पर सवाल उठाते हैं और कहते हैं कि इतना दाम घटाने से कलाकारों के लिए पैसा ही नहीं बचता.

वे कहते हैं, "जापान में कोई कलाकार जितना एक हफ़्ते में कमा लेता है, उतना तो दक्षिण कोरिया के कलाकार साल भर में नहीं कमा पाते."

दक्षिण कोरिया के आर्टिस्ट्स यूनियन के एक पूर्व निदेशक मून जे गैप का कहना है कि कोरियाई पॉप इंडस्ट्री के एक बड़े परिवर्तन की ज़रुरत है और वो जब तक नहीं होता, ये इंडस्ट्री का टिके रह पाना कठिन होगा.

दक्षिण कोरियाई सरकार भी अपनी इस नई अंतरराष्ट्रीय पहचान को भुनाना चाहती है.

सवाल यही है कि कोरियाई पॉप इंडस्ट्री अपनी लोकप्रियता की वजह से जाना जाएगा या अपनी समस्याओं के लिए.

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