दस महीने बाद, अब घर के रास्ते

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Image caption सोमाली लुटेरों ने नाविकों की रिहाई के लिए 40 लाख डॉलर की फिरौती मांगी थी.

दस महीनों तक सोमाली समुद्री लुटेरों की कैद में रहने के बाद 22 नाविक आखिरकार कराची पहुँच गए हैं. इनमें छह भारतीय हैं.

पाकिस्तानी नौसेना का युद्धपोत पीएनएस ज़ुल्फ़िक़ार क़डी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गुरुवार को कराची की बंदरगाह पहुँचा जहां नाविकों का भव्य स्वागत किया गया.

नाविक जब जहाज़ से उतरे तो उन्होंने एक दूसरे को शुभकामनाएँ दी. भारतीय नाविकों ने वहां मौजूद पाकिस्तानी अधिकारियों का शुक्रिया भी अदा किया.

पाकिस्तानी अधिकारियों ने छह भारतीय नाविकों को कराची में भारतीय अधिकारियों के हवाले किया.

भारत सरकार ने अपने नाविकों की भारत रवानगी के लिए पाकिस्तान में अपने उच्चायोग के एक वरिष्ठ अधिकारी को इस्लामाबाद से कराची भेजा है.

इन भारतीय नाविकों को शुक्रवार को भारत रवाना किया जाएगा.

पाकिस्तान की यात्रा पर आई भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षित भारत रवानगी के लिए वे लगातार पाकिस्तानी अधिकारियों से संपर्क में हैं.

दस महीने बाद रिहाई

पीएनएस ज़ुल्फ़िक़ार में आए नाविकों में चार पाकिस्तानी, 11 मिस्री, छह भारतीय और एक श्रीलंकाई नागरिक हैं.

ग़ौरतलब है कि यह नाविक मिस्र के एक मालवाहक जहाज़ एमवी स्वेज़ में सवार थे जिसका करीब 10 महीने पहले सोमाली लुटेरों ने अपहरण कर लिया था.

जहाज़ पर सवार नाविकों को छोड़ने के लिए अपहरणकर्ताओं ने 40 लाख डॉलर की मांग की थी.

ख़बरों के मुताबिक फिरौती का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता अन्सार बर्नी की ट्रस्ट के द्वारा दिया गया.

इसके बाद ही सोमाली लुटेरे नाविकों को छोड़ने के लिए राज़ी हुए.

फिर नाविकों को छुड़वाने के लिए पाकिस्तान और भारत की ओर से दो युद्धपोत भेजे गए.

लेकिन सोमाली लुटेरों के जहाज़ के पास पहुंचने के बाद पाकिस्तानी नौसेना के युद्धपोत पीएनएस ज़ुल्फ़िक़ार और भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस गोदावरी के एक-दूसरे के रास्ते में बाधा डालने के आरोप-प्रत्यारोप भी लगे.

इस बीच एमवी स्वेज़ का ईंधन ख़त्म हो गया और जहाज़ को अरब देश ओमान की बंदरगाह ले जाया गया.

वहां सभी नाविकों को पाकिस्तानी नौसेना के युद्धपोत में सवार कर कराची की बंदरगाह लाया गया.

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