'सैन्य तकरार की रिश्तों में जगह नहीं'

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भारत और पाकिस्तान के बीच इस्लामाबाद में विदेश सचिव स्तर पर शुक्रवार को वार्ता की अंतिम बैठक समाप्त हो गई जिसमें कश्मीर समस्या पर भी बातचीत हुई.

दोनों देश विश्वास बहाली के नए क़दमों पर चर्चा करने पर राज़ी हो गए हैं. शाम को इस्लामाबाद में विदेश सचिवों ने संयुक्त बयान जारी किया.

भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव और पाकिस्तानी विदेश सचिव ने कहा है कि बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा. अगला दौर जुलाई में होगा.

मुलाक़ात के बाद निरुपमा राव ने कहा, “ हमारी बातचीत महत्वपूर्ण रही, चर्चा बड़े ही ख़ुशगवार माहौल में हुई. लेकिन मैं कहना चाहूँगी कि सैन्य तकरार की विचारधारा की 21वीं सदी में हमारे रिश्तों में कोई जगह नहीं है.”

भारत की विदेश सचिव गुरुवार को पाकिस्तान पहुँची थी और उन्होंने अपने पाकिस्तानी समकक्ष सलमान बशीर से मुलाक़ात की थी जिसके बाद औपचारिक रुप से वार्ता की पहली बैठक हुई.

शुक्रवार को संयुक्त बयान में कह गया है, “भारत और पाकिस्तान दोनों इस बात को समझते हैं कि आतंकवाद शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा है. आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाया जाया चाहिए. परमाणु मुद्दों के जिन मामलों पर सहमति बनी हुई है उन पर अमल करने केलिए विशेषज्ञों की स्तर रप बातचीत की शुरुआत की जाएगी.”

आगे का रास्ता

इस वार्ता में कश्मीर पर भी विस्तार से बातचीत की गई और नियंत्रण रेखा की दोनों ओर व्यापार को बढ़ाने और आम लोगों की आवाजाही केलिए एक वर्किंग ग्रुप बनाया गया है जिसमें की बैठक जुलाई में होगी.ا

वार्ता में वीज़ा पर भी बातचीत की गई और वीज़ा निय़मों के नरम करने पर सहमति जताई गई

इससे पहले इसी साल फ़रवरी में भूटान की राजधानी थिम्पू में हुए सार्क सम्मेलन के दौरान भारत की विदेश सचिव निरूपमा राव ने पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर से मुलाक़ात की थी. उस मुलाक़ात के बाद दोनों विदेश सचिवों ने तमाम मुद्दों को बातचीत के ज़रिए सुलझाने पर सहमति जताई थी. इसके बाद क्रिकेट के विश्व कप मुक़ाबले में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए सेमीफ़ाईनल मैच को देखने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी अपने भारतीय समकक्ष मनमोहन सिंह के न्यौते पर मोहाली गए थे. मोहाली में दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाक़ात के दौरान भी इस बात को दोहराया गया था कि दोनों देश इस बात पर सहमत है कि सभी मुद्दों को बातचीत के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए.

दोनों देशों के बीच आतंकवाद, कश्मीर समस्या, शांति और सुरक्षा, एक दूसरे के बीच विश्वास की बहाली और मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ाने के लिए बातचीत हो रही है. 2008 में भारत के मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद से संबंधों को सुधारने के लिए नए सिरे से प्रयास कर रहें हैं और यह बातचीत भी उसी कोशिश का एक हिस्सा है.

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