इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्ने पलटें तो 28 जून के दिन अमरीका ने वर्ष 2004 में इराक़ को सत्ता वापस सौंपी थी और वर्ष 1960 में वेल्स में खदान में धमाका होने से 37 खनिकों की मौत हो गई थी.

2004: अमरीका ने इराक़ियों को सत्ता सौंपी

Image caption दिसंबर, 2003 में गिरफ़्तारी के बाद जारी सद्दाम हुसैन की तस्वीर

इराक़ी राजधानी बग़दाद में एक छोटे से समारोह में अमरीका ने इराक़ के शासन की बागडोर दोबारा इराक़ी लोगों को सौंप दी.

ये औपचारिकता दो दिन बाद पूरी की जानी थी पर हिंसा भड़कने की आशंकाओं के चलते अमरीकी प्रशासकीय अधिकारी पॉल ब्रेमर ने 28 जून को ही इराक़ी जज मिग़ात-अल-महमूदी को ये ज़िम्मेदारी दे दी.

इसके थोड़ी देर बाद ही ब्रेमर इराक़ से अमरीका रवाना हो गए. उनके जाने से इराक़ पर 15 महीनों का अमरीकी नियंत्रण ख़त्म हो गया.

इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री इयाद अलावी ने इस दिन को देश के लिए ऐतिहासिक बताया.

इसके कुछ ही देर बाद नए प्रधानमंत्री अलावी के मंत्रिसमूह ने शपथ ली और फिर टेलिविज़न के ज़रिए जनता को संबोधित किया.

अपने संबोधन में उन्होंने अपनी जनता से 'देश का विनाश कर रही विदेशी ताकतों' के ख़िलाफ एकजुट हो विरोध करने को कहा.

मार्च, 2003 में अमरीका ने ब्रिटेन और कुछ अन्य सहयोगी देशों के साथ इराक़ पर हमला कर दिया था. उन्हें संदेह था कि सद्दाम हुसैन महाविनाश के हथियार बना रहे हैं. हालांकि इराक़ से महाविनाश के हथियार कभी नहीं मिले.

अमरीकी फ़ौज ने पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को दिसंबर में गिरफ़्तार कर लिया था और बाद में एक मुक़दमे के बाद उन्हें फाँसी दे दी गई थी.

1960: कोयला खदान के धमाके में 37 की मौत

Image caption हादसे के बाद खदान के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी

वेल्स के मोनमाउथशर की एक कोयला खदान में गैस से हुए धमाके में 37 खनिकों की मौत हो गई.

70 साल पुरानी उस खदान में धमाके के व़क्त 700 लोग काम कर रहे थे.

सिक्स बेल्स कोलियरी नाम की इस खदान में सतह से 1,000 फ़ुट नीचे काम चल रहा था जब ये हादसा हुआ.

हादसे के फ़ौरन बाद राहतकर्मियों की छह टीमें बनाईं गईं लेकिन खदान में काफ़ी गैस भरी होने की वजह से राहत कम में दिक्कतें आती रहीं.

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