त्रिपोली से कुछ ही दूर सेना-विद्रोहियों की जंग

  • 27 जून 2011
लीबियाई विद्रोही, सेना के एक टैंक पर कब्ज़े के बाद इमेज कॉपीरइट BBC World Service

पश्चिमी लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे विद्रोहियों का कहना है कि वे राजधानी त्रिपोली के मात्र तीस मील दूर हैं. वहाँ सरकार को समर्थन दे रही सेना और विद्रोहियों के बीच भीषण लड़ाई हो रही है.

विद्रोहियों के साथ चल रहे बीबीसी संवाददाता मार्क डॉयल का कहना है कि एक डॉक्टर ने उन्होंने बताया है कि इस लड़ाई में दो विद्रोही मारे गए हैं जबकि विद्रोहियों के अनुसार सरकारी सेना को बहुत नुक़सान पहुँचा है. लेकिन इसकी स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है.

ट्यूनिशिया और मिस्र में इस साल फ़रवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद लीबिया में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरु हुए जिन्होंने जल्द ही शस्त्र विद्रोही का रूप ले लिया.

विद्रोही लीबिया में वर्ष 1969 में सैन्य तख़्तापलट के बाद से सत्ता में बने हुए कर्नल गद्दाफ़ी के सत्ता से बाहर जाने और व्यापक राजनीतिक बदलाव की मांग कर रहे हैं.

इस साल मार्च में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लीबिया में 'नो फ़्लाई ज़ोन' बनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी थी और इसके बाद नैटो ने कर्नल गद्दाफ़ी के कब्ज़े वाले क्षेत्र के बाहर से ही लीबिया पर भीषण मिसाइल हमले शुरु कर दिए थे.

महत्वपूर्ण है कि विदेशी सेनाएँ विद्रोहियों की ज़मीनी कार्रवाई में भाग नहीं ले रही हैं और ज़मीनी जंग लीबियाई विद्रोही ही लड़ रहे हैं.

विद्रोहियों को पीछे से घेरने का प्रयास

विद्रोहियों के साथ नाफ़ूसा के पहाड़ों में सफ़र कर चट्टानों और रेगिस्तान के क्षेत्र में राजधानी त्रिपोली से मात्र तीस मील की दूरी पर पहुँचे बीबीसी के पत्रकार मार्क डॉयल ने विद्रोहियों की कार्रवाई का विवरण दिया है.

त्रिपोली को जाने वाली सड़क पर रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बीर आयाद गांव में पहुँचे मार्क डॉयल का कहना था कि रविवार की जंग तब शुरु हुई जब सरकारी सेना ने विद्रोहियों को पीछे से घेरने की कोशिश की थी.

अब लड़ाई बीर आयाद के उत्तर में बीर अल-घानाम नगर के पास हो रही है और एक एएफ़पी संवाददाता ने रॉकेटों और मशीनगनों से हो रही भीषण गोलाबारी की आवाज़ें सुनी हैं.

बीबीसी संवाददाता मार्क डॉयल का कहना है, "लंबी दूरी तक मार करने वाले अधिकतर हथियार कर्नल गद्दाफ़ी की सेना पास है और मुझे साफ़ तौर पर उनके इस्तेमाल की आवाज़े सुनाई दे रही हैं. गद्दाफ़ी की सेना ने विद्रोहियों की सप्लाई लाइनों को काटने की कोशिश की है. वे विद्रोहियों के आगे और उनके पीछे भी लड़ाई कर रहे हैं. सभी विद्रोहियों का मक़सद त्रिपोली पहुँचना है. लेकिन जब तक गद्दाफ़ी का सत्ता ढांचा चरमरा नहीं जाता, ये काम काफ़ी मुश्किल साबित हो सकता है."

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Image caption सरकार ने महिलाओं सहित लाखों लोगों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया गया है

ग़ौरतलब है कि विद्रोहियों ने मार्च में ज़ाविया शहर पर कब्ज़ा कर लिया था लेकिन सरकारी सेना ने तेल रिफ़ाइनरी वाले इस शहर से उन्हें पीछे धकेल दिया. लेकिन एक महीने बाद वहाँ फिर से लड़ाई शुरु हो गई.

विद्रोहियों के 'रक्षा मंत्री' जलाल अल-दघेली ने बीबीसी को बताया, "गद्दाफ़ी का साथ छोड़ने वाले लोग हमें बता रहे हैं कि गद्दाफ़ी के समर्थकों की संख्या घट रही है. उनके क़रीबी हर दिन उनका साथ छोड़ रहे हैं."

वार्ता, चुनाव की पेशकश

उधर दक्षिण अफ़्रीका में रविवार को अफ़ीकी यूनियन की एक समिति की बातचीत के बाद यूनियन ने गद्दाफ़ी के वार्ता प्रक्रिया में भाग न लेने का स्वागत किया.

गद्दाफ़ी के प्रवक्ता मूसा इब्राहीम ने त्रिपोली में कहा है कि सरकार ने राष्ट्रीय वार्ता और संयुक्त राष्ट्र-अफ़्रीकी यूनियन की देखरेख में चुनावों की पेशकश की है. लेकिन उन्होंने गद्दाफ़ी के त्रिपोली में होने या न होने की पुष्टि नहीं की है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने उनके हवाले कहा, "यदि लीबिया के लोग तय करते हैं कि गद्दाफ़ी चले जाएँ तो वे चले जाएँगे. यदि वे तय करते हैं कि गद्दाफ़ी रहें तो वे रहेंगे. गद्दाफ़ी ने 1969 से देश का नेतृत्व किया है, वे निर्वासन में नहीं जाएँगे."

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