रफ़ीक़ हरीरी हत्याकांड में फ़ैसला

  • 30 जून 2011
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Image caption रफ़ीक़ हरीरी की हत्या 2005 में हुई थी

लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक़ हरीरी की हत्या की जाँच कर रहे संयुक्त राष्ट्र के ट्राइब्यूनल ने सीलबंद लिफाफे में अपना फ़ैसला लेबनान के सरकारी वकील सईद मिर्ज़ा को सौंप दिया है.

माना जा रहा है कि इस लिफ़ाफ़े में दोषी ठहराए गए लोगों के नाम हैं, जो अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं. सईद मिर्ज़ा के मुताबिक़ उन्हें चार लोगों के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट मिला है.

लेबनान की मीडिया के मुताबिक़ ट्राइब्यूनल ने चरमपंथी गुट हिज़्बुल्लाह के चार सदस्यों को हत्या के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है. इनमें एक सीनियर कमांडर भी है.

हिज़्बुल्लाह रफ़ीक़ हरीरी की हत्या में अपनी भूमिका से इनकार करता रहा है. हिज्बुल्लाह के नेता अपने किसी सदस्य की संभावित गिरफ़्तारी पर चेतावनी भी दे रहे हैं.

मुश्किल

लेबनान से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हिज़्बुल्लाह सरकार में एक प्रमुख शक्ति होने के कारण गिरफ़्तारियों के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल होगा.

रफ़ीक़ हरीरी के बेटे साद हरीरी ने इसे लेबनान के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया है. एक बयान में उन्होंने कहा, "कई वर्षों के संयम और संघर्ष के बाद आज हमने लेबनान की राजनीति, न्याय व्यवस्था और सुरक्षा का एक ऐतिहासिक क्षण देखा है."

फरवरी 2005 में एक बड़े बम धमाके में रफ़ीक हरीरी और 21 अन्य लोग मारे गए थे. हिज़्बुल्लाह ने शुरू से ही हरीरी की हत्या की जाँच के लिए गठित ट्राइब्यूनल का विरोध किया था.

हिज़्बुल्लाह का आरोप है कि ये अमरीका, इसराइल और फ़्रांस की साज़िश है.

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