बहरीन में विपक्ष के साथ बातचीत

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Image caption बहरीन में फ़रवरी में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में 30 से अधिक लोग मारे गए थे

बहरीन के शासकों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद पहली बार विपक्ष के साथ औपचारिक बातचीत शुरू की है.

वहाँ के सुन्नी शासक शाह हमद बिन इसा अल ख़लीफ़ा ने कहा है कि बैठक में हर विकल्प पर विचार किया जाएगा.

सुन्नी शासक कई महीनों के प्रदर्शनों के बाद हो रही बैठक में शिया राजनेताओं से बात कर रहे हैं.

बैठक के शुरू होने का सरकारी टीवी पर प्रसारण किया गया.

बहरीन की संसद के अध्यक्ष ने कहा कि बातचीत बिना किसी पूर्व शर्त और बिना किसी पाबंदी के हो रही है.

उन्होंने कहा कि लक्ष्य ये है कि राजनीतिक सुधार की प्रक्रिया शुरू करने के लिए साझा सिद्धांत बनाए जाएँ.

बातचीत औपचारिक शुरूआत के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई है.

बहरीन में इस वर्ष के आरंभ में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को रोकने के लिए की गई कार्रवाई में 30 से अधिक लोग मारे गए थे.

शिया विपक्षी

बैठक में हिस्सा ले रहे सबसे बड़े शिया विरोधी गुट अल विफ़ाक़ के प्रतिनिधियों ने कहा है कि बातचीत में वे अपनी माँगों के साथ समझौता नहीं करेंगे.

उनके नेता ने शुक्रवार को कहा था कि उनकी माँगें हैं – कि एक निर्वाचित सरकार हो, एक निष्पक्ष चुनावी क़ानून बने और एक निर्वाचित संसद हो जिसे पूर्ण अधिकार दिए जाएँ.

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Image caption बहरीन के शाह ख़लीफ़ा ने कहा है कि सभी विकल्प ख़ुले हैं

बहरीन की बहुसंख्यक शिया आबादी लंबे समय से भेदभाव की शिकायत करती रही है.

इस वर्ष के आरंभ में ट्यूनीशिया और मिस्र में हुए जनविद्रोह के बाद बहरीन में भी हज़ारों लोग सड़कों पर निकल पड़े थे.

फ़रवरी में सुरक्षाबलों ने राजधानी मनामा के पर्ल स्क्वायर पर जमा प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ बरसाईं, मार्च में बहरीन के शासक ने प्रदर्शन को दबाने के लिए पड़ोसी देश सउदी अरब से सुरक्षाबलों को बुला लिया.

प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में 30 से अधिक लोग मारे गए थे और सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

बहरीन सरकार ने बातचीत से पहले घोषणा की है कि प्रदर्शनों से निबटने के लिए की गई सुरक्षाबलों की कार्रवाई की जाँच की जाएगी.

सउदी सैनिकों में से भी अधिकतर लौट चुके हैं और आपात क़ानूनों को भी वापस लिया जा रहा है.

विरोधाभास

हाल ही में बहरीन से लौटे बीबीसी संवाददाता रूपर्ट विंगफ़ील्ड हेज़ कहते हैं कि बहरीन स्थिति विरोधाभासी भी लगती है.

एक तरफ़ वहाँ राजनीतिक बातचीत शुरू की गई है मगर दूसरी तरफ़ डॉक्टरों और राजनीतिक असंतुष्टों पर मुक़दमा भी चलाया जा रहा है.

प्रेक्षकों की नज़र इस बात पर भी है कि बातचीत में जुटे 300 लोगों में से विपक्ष के केवल 35 लोग बुलाए गए हैं.

साथ ही बैठक में जो भी तय हो, उसे संसद के ऊपरी सदन - शूरा परिषद - में निरस्त किया जा सकता है. इस सदन के सदस्य निर्वाचित नहीं होते, उनकी नियुक्ति होती है.

वहाँ 48 डाक्टरों को पकड़ा गया था जिनमें 20 के ख़िलाफ़ गंभीर आपराधिक आरोप लगाए गए हैं.

सरकार ने प्रदर्शन के दौरान पकड़े गए सभी बंदियों की रिहाई की माँग ठुकरा दी है.

आठ शिया विपक्षी नेताओं को पिछले महीने आजीवन कारावास की सज़ा भी सुनाई गई थी, उसे भी वापस नहीं लिया गया है. ब

बहरीन के मंत्रियों ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों को ईरान का समर्थन हासिल है.

हालाँकि प्रदर्शनकारी इसे ग़लत बताते हैं और सरकार ने भी इसका कोई सबूत नहीं दिया है.हालाँकि प्रदर्शनकारी इसे ग़लत बताते हैं और सरकार ने भी इसका कोई सबूत नहीं दिया है. फ़िलहाल बातचीत हो रही है.

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