अमरीकी अब भी कार ख़राब होने, नौकरी जाने से चिंतित: ओबामा

आयोवा की डेवेनपोर्ट फ़ैक्टरी में ओबामा इमेज कॉपीरइट BBC World Service

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने साप्ताहिक रेडियो संदेश में देश के बजट घाटे को कम करने, अमीरों को करों में मिल रही रियायतें घटाने और नई नौकरियाँ पैदा करने पर बल दिया है.

उन्होंने कहा है कि करों में रियायतों का ख़त्म करने के विषय में भी क्षेत्र या वर्ग को इससे मुक्त नहीं मानना चाहिए.

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उधर राष्ट्रपति ओबामा के रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी कर बढ़ाने के कदमों का विरोध कर रहे हैं और कहते हैं कि सरकार ख़र्चा घटाए.

बजट के मुद्दे पर रिपब्लिकन और डेमोक्रैट्स के बीच सहमति बनना ज़रूर है ताकि सरकारी ख़र्चे के लिए सरकार की कर्ज़ा लेने की क्षमता बढ़ाई जा सके.

अमरीकी वित्त मंत्रालय के कहना है कि यदि ऐसा नहीं होता तो अगस्त तक सरकार कर्ज़ लेने की अपनी सीमा तक पहुँच जाएगा और अमरीका को अपने वित्तीय वादों को पूरा न करने के ख़तरे को झेलना पड़ेगा.

अमीरों को कर-रियायतों से बुरा असर

शनिवार को अपने संदेश में ओबामा ने कहा, "आज भी कई लोग आर्थिक मंदी के असर से जूझ रहे हैं. उनके मन में सवाल हैं कि यदि कार ख़राब हो गई, नौकरी चली गई तो क्या होगा. वे यकीन से नहीं कह सकते कि अपने बच्चों की कॉलेज की फ़ीस दे पाएँगे या नहीं. मैं राष्ट्रपति पद के लिए इसलिए लड़ा क्योंकि मैं ये मानता हूँ कि यदि कोई आम आदमी मेहनत करता है तो वह जीवन स्तर बेहतर बना सकता है."

उन्होंने अमरीका के वित्तीय घाटे का ज़िक्र करते हुए कहा, "हम देश का वित्तीय घाटा कम करना चाहते हैं. परिवारों की तरह सरकार को भी अपने साधनों में रहना होगा. हम जिस ख़र्च का भार नहीं उठा सकते, उसे बंद करना होगा."

अमीर लोगों पर सीधा नीशाना साधते हुए ओबामा ने कहा, "पिछले कुछ हफ़्तों में मैंने और उप राष्ट्रपति ने राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद ख़र्चे को एक खरब डॉलर घटाने की बात की है. इसका मतलब ये है कि हर कार्यक्रम और बजट में दी गई हर कर-रियायत का आकलन होगा. कुछ भी इस सिद्धांत से मुक्त न माना जाए, विशेष तौर पर वो कर रियायतें नहीं जिनसे कुछ लोगों और कॉरपोरेशनों को फ़ायदा होता है."

राष्ट्रपति ओबामा ने ज़ोर देकर कहा कि यदि अरबपतियों और खरबपतियों को करों में रियायतें दी जाती हैं तो इसका असर आम लोगों - छात्रों, शोधकर्ताओं, स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि अमरीका के भविष्य से संबंधित पूँजी निवेश - शिक्षा, शोध और तकनीक जैसे क्षेत्रों में - जारी रहना चाहिए ताकि इससे और नौकरियाँ पैदा की जा सकें.

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