इतिहास के पन्नों से...

  • 4 जुलाई 2011

इतिहास के पन्ने पलटें तो चार जुलाई का दिन कई वजहों से याद किया जाएगा.

1947: भारत के बंटवारे का विधेयक पेश

Image caption बंटवारे के ऐलान के बाद 30 ख़ास ट्रेनों के ज़रिए प्रशासनिक अधिकारी भारत के नई दिल्ली से पाकिस्तान के कराची ले जाए गए.

ब्रिटेन के शासन से आज़ाद होने के बाद भारत का स्वरूप कैसा होगा, यही तय करने के लिए ब्रिटेन की संसद में चार जुलाई 1947 को 'द इंडियन इंडिपेन्डेंस ऐक्ट' पेश हुआ.

इसी विधेयक में भारत के बंटवारे और एक अलग देश - पाकिस्तान के बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया था.

ये विधेयक 18 जुलाई को पारित हुआ. इसके तहत ब्रितानी हुकूमत के भारत छोड़ने यानी भारत के स्वतंत्र होने की तारीख़ 15 अगस्त 1947 तय की गई.

इसी के तहत बंगाल प्रांत का विभाजन पूर्वी बंगाल और पश्चिम बंगाल में और पंजाब प्रांत का विभाजन पूर्वी पंजाब और पश्चिमी पंजाब में कर दिया गया.

इसी क़ानून के तहत भारत और पाकिस्तान की सीमाएँ तय करने के लिए एक 'सीमा आयोग' बनाने का फ़ैसला किया गया. इस आयोग की अध्यक्षता सर रेडक्लिफ़ ने की थी. उन्ही के नाम पर भारत और पाकिस्तान की सीमा को रेडक्लिफ़ लाइन कहा गया.

'द इंडियन इंडिपेन्डेंस ऐक्ट' के तहत ब्रिटेन के राजा को भारत के सम्राट की पदवी छोड़नी पड़ी.

भारत के विभाजन के साथ ही इस क़ानून में भारतीय सेना के बंटवारे के बारे में भी दिशा-निर्देश दिए गए थे.

2010: प्रोफ़ेसर के हाथ काटे

Image caption प्रोफेसर जोसेफ पर इस्लाम के अपमान का आरोप लगाया गया था.

एक परीक्षा पत्र में कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने के आरोप की वजह से आठ हमलावरों ने एक प्रोफ़ेसर पर हमला कर उनके हाथ काट दिए.

केरल के प्रोफ़ेसर जोसेफ़ पर जिस समय हमला हुआ था, उस समय उन्हें थोडूपुझा स्थित न्यूमैन कॉलेज से बर्ख़ास्त कर दिया गया था और उन पर इस्लाम का अपमान करने के कारण आपराधिक आरोप लगाए गए थे.

प्रोफ़ेसर के परिवार वालों ने इस आरोप का ज़ोर से खंडन किया था. उनका कहना था कि परीक्षा पत्र में पैंगंबर मोहम्मद साहब को लेकर किसी भी तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया था.

प्रोफ़ेसर टीजे जोसेफ़ पर उस वक़्त हमला किया गया, जब वे चर्च से अपनी माँ और बहन के साथ घर वापस लौट रहे थे.

इस हमले के सिलसिले में पाँच जुलाई को 'प्रिडॉमिनेंटली मुस्लिम फ़्रंट ऑफ़ इंडिया' के दो कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया. केरल सरकार और कई मुस्लिम संगठनों ने इस हमले की निंदा भी की.

इससे पहले मार्च में विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने थोडूपुझा में प्रश्न पत्र को लेकर विवाद खड़ा होने पर उग्र प्रदर्शन किया था और कई लोग पुलिस के साथ हुई झड़प में घायल हुए थे.

तब प्रोफ़ेसर जोसेफ़ को गिरफ़्तार किया गया था और अप्रैल में उन्हें ज़मानत दे दी गई थी.

संबंधित समाचार