भारत-बांग्ला संबंधों में बुनियादी बदलाव

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Image caption भारत के विदेशमंत्री एसएम कृष्णा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दौरे से पहले ढाका पहुँचे

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना पिछले साल भारत के दौरे पर दिल्ली पहुँची थीं. तभी दोनों देशों के संबंधों में बुनियादी बदलाव देखा गया था.

अब भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा की तारीख़ें तय हो चुकी हैं और उससे पहले भारतीय विदेशमंत्री एसएम कृष्णा आज ढाका पहुँच चुके हैं.

अब वक़्त है कि भारत और बांग्लादेश के परस्पर संबंधों में आए बदलाव के नतीजे हासिल होने चाहिए.

प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की यात्रा के समय से ही दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर समझौते की प्रक्रिया शुरू हुई और अब इन समझौतों को अंतिम स्वरूप दिया जाना है.

प्रगाढ़ रिश्ते

ख़ास तौर पर तीस्ता नदी के पानी के बँटवारे को लेकर समझौता होना है. दूसरी ओर दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर साढ़े छह किलोमीटर का हिस्सा है जिसे लेकर विवाद है. साथ ही एक दूसरे देश की सीमा के भीतर ज़मीनों के टुकड़े हैं, जिनके बारे में समझौते किए जाने हैं.

दोनों देशों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए जनता का आपसी संपर्क बढ़ाया जाना ज़रूरी है और व्यापार इसका एक महत्वपूर्ण ज़रिया है.

दोनों देशों में कॉरपोरेट सेक्टर चाहेगा कि दोनों देश अपना माल दूसरे के यहाँ भेजें. इससे पहले कि भारत का माल बांग्लादेश पहुँचे, वहाँ के माल की खपत भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में होने की असीम संभावनाएँ हैं.

इसके अलावा बहुत की ढाँचागत परियोजनाए हैं जिन्हें पूरा किया जाना है. एक अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन का मामला तय किया जाना है. रेल पटरियाँ बिछाई जानी हैं, सिग्नल बनाए जाने हैं... ये सब महत्वपूर्ण मामले हैं.

विवाद के बाद

इस बीच दिल्ली के कुछ संपादकों के साथ हुई बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के एक बयान से विवाद हुआ. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के 25 प्रतिशत लोग जमाते इस्लामी की क़समें खाते हैं और वो आइएसआइ की गिरफ़्त में हैं.

मुझे लगता है कि अब विवाद से आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि भारत सरकार इस बात की पड़ताल कर रही है कि आख़िर ये हुआ कैसे.

मुझे ऐसा नहीं लगता कि इस बयान से बातचीत के दौरान भारत की स्थिति कमज़ोर होगी.

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