इतिहास के पन्नों से

  • 7 जुलाई 2011

इतिहास के पन्नों को पलटें तो, सात जुलाई के दिन लंदन की भूमिगत ट्रेन सेवा और बसों में बम धमाके हुए थे जिनमे कई लोग मारे गए थे और सैकड़ों लोग घायल हुए थे. इसी दिन वर्ष 1985 में महज़ 17 साल की उम्र में बोरिस बेकर ने विंबलडन में एकल पुरुष का ख़िताब जीता था.

2005 : लंदन में बम धमाके

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Image caption ये धमाके सुबह उस समय हुए थे जब बसें ट्रेनें दफ़्तर जाने वालों से भरी रहती हैं

साल 2005 में सात जुलाई ही के दिन लंदन की भूमिगत ट्रेन सेवा में तीन धमाके और बसों में दो धमाके हुए थे. इन चरमपंथी हमलों में 37 लोग मारे गए और 700 लोग घायल हुए थे.

बाद में इन धमाकों के चलते मरने वालों की तादाद बढ़कर 52 तक जा पहुँची. जाँच में पता चला कि ये धमाके चार आत्मघाती हमलावरों ने किए थे.

ट्रेन के अंदर तीन में से पहले धमाका सुबह 8.30 बजे हुआ था, जब ट्रेने सुबह दफ्तर जाने वालों से भरी हुई थीं. आख़िरी धमाका क़रीब घंटे भर बाद एक डबलडेकर बस में हुआ.

तत्कालीन विदेश मंत्री जैक स्ट्रा ने धमाकों के बाद बयान दिया कि धमाकों को देख कर उन पर अल क़ायदा के चिह्न साफ़ दिखाई देते हैं. प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा कि दोषी लोगों को हर हाल में क़ानून का सामना करना पड़ेगा. सितंबर महीने में अल क़ायदा ने एक वीडियो संदेश जारी कर इन धमाकों के ज़िम्मेदारी ली.

इसके बाद 21 जुलाई को चार और धमाके करने की कोशिश की गई, लेकिन इन चार में से एक भी बम नहीं फटा.

1985 : बोरिस बेकर ने महज़ 17 साल उम्र में विंबलडन जीता

Image caption बोरिस बेकर ने महज़ 17 साल की उम्र में ये ख़िताब जीत कर हंगामा मचा दिया था

पश्चिम जर्मनी के एक 17 वर्षीय किशोर बोरिस बेकर ने टेनिस का महत्वपूर्ण ख़िताब विंबलडन जीत कर खेल की दुनिया में हंगामा मचा दिया. ग़ैर वरीयता प्राप्त बेकर ने जब विंबलडन की ट्रॉफी उठाई, तो मैदान तालियों से गूँज उठा.

बेकर न केवल इस ख़िताब को जीतने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे, बल्कि वो इस ख़िताब को पाने वाले पहले जर्मन खिलाड़ी भी थे.

अपनी जीत के बाद बेकर ने कहा था, "इस जीत से जर्मनी में टेनिस बदल जाएगा. मैंने पहला विंबलडन जीता है और अब उनके पास एक आदर्श है."

बेकर को उनके आक्रामक अंदाज़ और तीखे तेवरों के कारण अलग पहचान मिली.

अपनी आक्रामकता को जायज़ ठहराते हुए बेकर ने कहा कि वो कोर्ट पर जीतने के लिए जाते हैं, लड़ने के लिए जाते हैं और वो सब कुछ करने के लिए जाते हैं जो वो कर सकते हैं.

बोरिस बेकर ने विंबलडन पुरुष एकल ख़िताब अगले साल फिर जीता और उसके बाद तीसरी बार 1989 में जीता. कुल मिला कर उन्होंने अपने करियर में छह ग्रैंड स्लैम ख़िताब जीते. साल 1991 में बेकर दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी की वरीयता पर भी आ गए थे.