कराची में राजनीतिक हिंसा पर चिंता

पाकिस्तान इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption कराची शहर में गैंगों की आपसी लड़ाई चरम पर है

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस साल की शुरूआत से अब तक पाकिस्तान के कराची शहर में 1100 लोग से ज़्यादा राजनीतिक हिंसा का शिकार हुए हैं.

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने इस स्थिति के लिए शहर के अधिकारियों की आलोचना की है.

ज़्यादातर हिंसा प्रतिद्वंदी अपराधी गुटों के बीच हुई लड़ाई का नतीजा है.

हालांकि मानवाधिकार आयोग का आरोप है कि इन सशस्त्र गुटों को शहर के प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की शह मिली हुई है, जिसकी वजह से वे बेख़ौफ हिंसा का चक्र चलाते हैं.

आरोप

आयोग की प्रमुख ज़ोहरा यूसुफ़ ने एक पत्रकार सम्मेलन में ये बातें कहीं.

कराची में बीबीसी संवाददाता शाज़ेब जिलानी का कहना है कि इस तरह की सुनियोजित हत्याएँ शहर में रोज़मर्रा की बात हो गई है.

कराची पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर है और एक प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र भी.

बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक़ ये शहर पूरे देश के राजस्व के आधे हिस्से का ज़िम्मेदार है. लेकिन अब ये कई सशस्त्र गुटों की जबरन उगाही, माफ़िया की लड़ाई और भूमि अधिग्रहण शिकार हो गया है.

कई लोगों को भय है कि पिछले सप्ताह सरकार से प्रमुख पार्टी मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट का निकल जाना राजनीतिक हिंसा और अस्थिरता को जन्म देगा.

मानावाधिकार आयोग के अनुसार 2010 में राजनीतिक हिंसा में 775 लोग मारे गए थे. जबकि सरकार के अनुसार ये संख्या केवल 500 की है.

संबंधित समाचार