राज्य पुनरीक्षण याचिका लगाएगा

  • 6 जुलाई 2011
एसपीओ

नक्सलियों के ख़िलाफ़ विशेष पुलिस अधिकारी यानी एसपीओ के इस्तेमाल को बंद करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा है कि वह फ़ैसले का अध्ययन करने के बाद पुनरीक्षण याचिका दायर करेगी.

नक्सलियों के ख़िलाफ़ चल रहे कथित जनांदोलन सलवा जुड़ूम के बारे में राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा है कि वह पाँच साल पुराना एक आंदोलन था जो अब ख़त्म हो चुका है.

हालांकि बीबीसी संवाददाता सलमान रावी के अनुसार कहने को सलमा जुड़ूम बंद हो चुका है लेकिन राज्य सरकार ने 'दंडकारण्य शांति संघर्ष मोर्चा' के नाम से सलवा जुड़ूम को जारी रखा हुआ है.

विशेषज्ञों की राय लेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने न केवल एसपीओ की नियुक्ति को असंवैधानिक बताया है बल्कि सलवा जुड़ूम को बंद करने और सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर बस्तर में हुए हमले की सीबीआई जाँच के भी आदेश दे दिए हैं.

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले को छत्तीसगढ़ सरकार के लिए एक बड़े झटके की तरह देखा जा रहा है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2007 में एक क़ानून के ज़रिए 18 से 25 वर्ष के आदिवासी युवकों को हथियार देकर उन्हें विशेष पुलिस अधिकारी यानी एसपीओ का दर्जा देने का प्रावधान किया था.

Image caption सलवा जुड़ूम आंदोलन लोगों के बीच कम एसपीओ के भरोसे ज़्यादा चलता रहा

इन एसपीओ की नियुक्ति ज़िला पुलिस अधीक्षक (एसपी) बिना किसी प्रक्रिया के कर सकते हैं. उन्हें प्रति माह तीन हज़ार रुपए दिए जाते हैं जिसकी 80 प्रतिशत राशि केंद्र की ओर से दी जाती है.

इस समय छत्तीसगढ़ में क़रीब 4,800 एसपीओ हैं जिनमें से 90 प्रतिशत की तैनाती दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर में है जहाँ नक्सली गतिविधियाँ सबसे अधिक हैं.

संवाददाताओं का कहना है कि चाहे वह राज्य की पुलिस हो या फिर अर्धसैनिक बल हों, एसपीओ की सहायता के बिना बस्तर के बहुत से इलाक़ों में उनकी गतिविधियाँ ठप पड़ सकती हैं.

छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर अपनी आरंभिक प्रतिक्रिया में कहा है कि फ़ैसले की प्रति मिलने के बाद क़ानून के विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी.

उन्होंने कहा कि सरकार पुनरीक्षण याचिका भी दायर कर सकती है.

इस बीच राज्य के पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन ने एक अख़बार से हुई बातचीत में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बुधवार की सुबह से सभी एसपीओ को कैंप में बुला लिया जाएगा और उनसे हथियार वापस ले लिए जाएंगे.

माओवादियों से लड़ने के लिए सलवा जुडूम के अस्तित्व के ख़िलाफ़ दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार का फ़ैसला दिया है.

ये याचिका समाजशास्त्री नंदिनी सुंदर, इतिहासकार रामचंद्र गुहा, पूर्व नौकरशाह ईएएस सरमा और अन्य लोगों ने दायर की थी जिसमें कहा गया था कि सलवा जुडूम को कथित मदद देने से राज्य सरकार को रोकने का निर्देश दिया जाना चाहिए.

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