अहमदीनेजाद की ख़ामेनेई को चुनौती

Image caption सर्वोच्च नेता ने राष्ट्रपति के एक कैबिनेट मंत्री को हटाने के फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया था.

ईरान के राष्ट्रपति ने जिस तरह देश के सर्वोच्च नेता के ख़िलाफ़ असहमति जताना शुरू कर दिया है, उसे देखते हुए बीबीसी के ईरान संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड ने ये सवाल उठाए हैं कि क्या राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहे हैं.

महमूद अहमदीनेजाद लोगों से भिड़ना पसंद करते हैं. उन्होने इसी तरह अपना राजनीतिक सफ़र तय किया है.

चाहे वो अमरीका के लगातार दो राष्ट्रपति हों, ईरान का विपक्षी ग्रीन आंदोलन हो, यूरोपीय संघ के ज़्यादातर देश हों, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर या फिर ईरान के कई रूढ़िवादी सांसद हों अहमदीनेजाद ने इन सभी का कभी न कभी विरोध किया है.

और अब शायद उन्हें ये लगने लगा था कि विरोधियों की सूची अधूरी है इसलिए उन्होने इस सूची में एक और नाम जोड़ दिया है. ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई का. या यूं कहें कि वो अपने ही नेता के ख़िलाफ़ खड़े हो गए हैं.

अहमदीनेजाद संतुष्ट नहीं

वॉशिंगटन डीसी में कार्नेगी एंडाउमेंट से जुड़े करीम सज्जादपोर कहते हैं,"मुझे लगता है कि अहमदीनेजाद अपने पद की प्रतिष्ठा को लेकर भ्रमित हैं और वो ख़ामेनेई के कनिष्ठ बनकर संतुष्ट नहीं हैं. वो ख़ुद को एक क्रांतिकारी और दूरदर्शी नेता के रूप में देखते हैं और शायद सिर्फ़ राष्ट्रपति बन कर संतुष्ट नहीं हैं.''

दोनों नेताओं के बीच झगड़ा शुरू होने की मुख्य वजह ये है कि ईरान के भविष्य को लेकर दोनों की सोच अलग-अलग है.

अली ख़ामेनेई दो दशक पहले अयातुल्लाह ख़ोमैनी के नेतृत्व में शुरु हुई इस्लामिक क्रांति की विरासत को उसी तरह सुरक्षित रखना चाहते हैं.

लेकिन अहमदीनेजाद उसे बदलना चाहते हैं. वो और उनके सहयोगी मौलवियों के हाथों से सत्ता छीन लेना चाहते हैं.

लेकिन ईरान में फ़ैसले करने का सर्वोच्च अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं बल्कि सर्वोच्च धार्मिक नेता के पास है.

ख़ामेनेई सर्वोच्च नेता

अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई का रिवोल्यूशनरी गार्ड के साथ बहुत पुराना और गहरा रिश्ता है और यही गठबंधन सर्वोच्च नेता की शक्ति का प्रमुख आधार भी है.

संसद भी अयातुल्लाह ख़ामेनेई और रिवोल्यूशनरी गार्ड का पक्ष लेती है.

Image caption ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई

महमूद अहमदीनेजाद को ईरान के मज़दूर वर्ग का समर्थन भले ही हासिल हो लेकिन उन्हें अयातुल्लाह ख़ामेनेई के बराबर शक्ति प्राप्त नहीं है.

इसीलिए अहमदीनेजाद ने अप्रैल में जब ख़ुफ़िया विभाग के मंत्री को बर्ख़ास्त करने की कोशिश की तो अयातुल्लाह ख़ामेनेई ने तुरंत उनके फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया. (राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने इस प्रकरण पर 10 दिन तक सार्वजनिक रूप से नाराज़गी व्यक्त की थी.)

अयातुल्लाह ख़ामेनेई और रिवोल्यूशनरी गार्ड में उनके समर्थक इस बात पर भी नज़र रखे हुए हैं कि 2013 में जब महमूद अहमदीनेजाद का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा तब क्या होगा. ईरान के संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति लगातार तीन बार राष्ट्रपति नहीं चुना जा सकता.

राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने अपने क़रीबी दोस्त और पूर्व सेनाध्यक्ष इस्फ़ंदियार रहीम मशाई को अपने उत्तराधिकारी के तौर पर पेश करने की कोशिश की है. मशाई ने देश को एक नया नारा दिया है, ''बिना मौलवियों का इस्लाम.''

इस पूरी कवायद से नाराज़ सर्वोच्च नेता ख़ामेनेई के कार्यालय ने अहमदीनेजाद, इस्फ़ंदियार मशाई और उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया है और उन पर जादू-टोना करने के आरोप लगाए हैं.

पूर्व राष्ट्रपति का निर्वासन

Image caption राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की राह आसान नहीं

पेरिस के बाहर एक हवेली में रहनेवाले एक शख़्स इस बात को अन्य किसी भी व्यक्ति से बेहतर जानते हैं कि ईरान में राष्ट्रपति और सर्वोच्च नेता जब एक-दूसरे के आमने-सामने होते हैं तो नतीजा क्या होता है.

अबुलहसन बनीसद्र 1980 में ईरान के राष्ट्रपति चुने गए थे. महमूद अहमदीनेजाद की तरह उन्होने भी तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह ख़ामेनेई को चुनौती दी थी और उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा था.

पद संभालने के एक साल बाद ही संसद ने उन पर महाभियोग लगाकर उन्हें हटा दिया और उसके बाद पिछले तीन दशकों से वो निर्वासित जीवन बिता रहे हैं. हालांकि उन्हें लगता है कि इस लड़ाई में आख़िरकार अली ख़ामेनेई और महमूद अहमदीनेजाद दोनों की ही हार होगी.

वो कहते हैं,''ख़ामेनेई तो पहले ही हार चुके हैं क्योंकि उनके पास और कोई विकल्प नहीं है. उन्होने ही अहमदीनेजाद को राष्ट्रपति बनाया और अब वो ही उन्हें बर्बाद कर रहे हैं. इसके बाद करने को और क्या बचता है. जिस तरह अरब में आंदोलन हो रहे हैं उसे देखते हुए उनके पास भी पद छोड़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता है.''

लेकिन इस आकलन में अबुलहसन बनीसद्र की इच्छा अधिक नज़र आती है.

अयातुल्लाह ख़ामेनेई और रिवोल्यूशनरी गार्ड में उनके शक्तिशाली समर्थक पीछे हटने वाले नहीं हैं.

महमूद अहमदीनेजाद को भले ही लगता हो कि वो जीत सकते हैं, लेकिन उन्हें ये भी याद रखना चाहिए कि आज जो कुछ वो कर रहे हैं, तीन दशक पहले वही सब करने वाले व्यक्ति का क्या हश्र हुआ था. अबुलहसन बनीसद्र आज अपने कमरे में बैठकर बस ईरान की घटनाओं पर नज़र रखते हैं.

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