माओ पर किताब को बीबीसी पुरस्कार

Image caption फ़्रैंक डिकोट्टर को चीनी लेखागारों तक पहुंच दी गई थी

चीन की विनाशकारी ग्रेट लीप फ़ॉरवर्ड पॉलिसी के बारे में लिखी गई एक किताब ने ग़ैर-कथा साहित्य के क्षेत्र में 20 हज़ार पाउंड का बीबीसी सैमुएल जॉनसन पुरस्कार जीत लिया है.

''माओज़ ग्रेट फ़ेमिन'' शीर्षक वाली ये किताब डच इतिहासकार फ़्रैंक डिकोट्टर ने लिखी है.

पुरस्कार की दौड़ में पाँच अन्य किताबें भी शामिल थीं.

चयन समिति के अध्यक्ष बेन मैकिन्टायर ने किताब की तारीफ़ करते हुए इसे ''मानवीय मूर्खता का महाकाव्यात्म दस्तावेज़'' बताया.

उन्होंने आगे कहा कि,''जो भी व्यक्ति बीसवीं सदी के इतिहास को समझना चाहता है उसके लिए ये एक महत्वपूर्ण किताब है.''

ग्रेट लीप फ़ॉरवर्ड पॉलिसी

''माओज़ ग्रेट फ़ेमिन'' से 1958 से 1962 के बीच की अवधि के बारे में कई नए ब्यौरे मिलते हैं.

माओ ने चीन का औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने के लिए जो 'ग्रेट लीप फ़ॉरवर्ड पॉलिसी' अपनाई थी उससे करोड़ों लोग भुखमरी का शिकार हो गए थे.

ये किताब उस दौर का विश्लेषण नए ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में करती है.

पुरस्कार की दौड़ में इस वर्ष शामिल अन्य किताबें थीं - एंड्र्यू डिक्सन की 'कारावैज्जियो: ए लाइफ़ सैक्रेड एंड प्रोफ़ेन; माया जैसेनॉफ़ की 'लिबर्टीज़ एक्ज़ाइल्स; मैट रिडले की 'द रैशनल ऑप्टीमिस्ट; जोनैथन स्टीनबर्ग की 'बिस्मार्क: ए लाइफ़ और जॉन स्टब्स की 'रिप्रोबेट्स'.

इन सभी किताबों को एक-एक हज़ार पाउंड की राशि दी गई.

ये पुरस्कार कथेतर साहित्य की वैसी किताबों के लिए था जो किसी भी राष्ट्रीयता के लेखक ने 1 मई 2010 और 30 अप्रैल 2011 के बीच अंग्रेज़ी में लिखी थी.

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