वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद आत्महत्या में तेज़ी

  • 8 जुलाई 2011
आत्महत्या
Image caption शोधकर्ताओं ने 10 यूरोपीय देशों में आत्महत्या के मामलों पर नज़र डाली.

शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद से यूरोपीय देशों में आत्महत्या की तादाद में तेज़ी आई है.

जानी मानी ब्रिटिश विज्ञान पत्रिका 'लैंसेट' में छपे एक लेख के मुताबिक़ आत्महत्या करनेवालों की संख्या उन मुल्कों में बढ़ी है जिनपर आर्थिक मंदी का असर ज़्यादा है.

साल 2008 में ग्रीस में ख़ुदकुशी करनेवालों की संख्या में 17 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि ऑयरलैंड में ये आंकड़ा 13 प्रतिशत था.

ब्रिटेन में आत्महत्या करनेवालों की संख्या में 10 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ था.

हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके पास इतने आंकड़े नहीं हैं कि वो ये अनुमान लगा पाएं कि इनमें से कितनी आत्महत्याएं आर्थिक मंदी से जोड़कर देखी जा सकती हैं.

अंश मात्र

विश्व स्वास्थ संगठन के हाल के आंकड़ों के आधार पर कहा गया है कि साल 2007 तक आत्माहत्या की संख्या में जो गिरावट देखी गई थी वो आर्थिक मंदी के बाद फिर से तेज़ हुई है.

लेकिन शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि ये आंकड़े पूरी स्थिति का अंश मात्र हैं.

उनके अनुसार आर्थिक मंदी का असर लोगों की मन:स्थिति पर बहुत बड़े पैमाने पर हुआ है जिसकी पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आ पाई है.

शोधकर्ताओं ने कहा है कि आस्ट्रेलिया में इसका असर नहीं देखने को मिला है क्योंकि वहाँ बेरोज़गारों की आर्थिक सहायता की बहुत मज़बूत व्यवस्था है.

शोध के दौरान एक बात और सामने आई कि पिछले सालों में जहाँ ख़ुदकुशी करनेवालों की तादाद ऊपर गई है वहीं सड़क दुर्घटना में मारे जानेवाले लोगों की संख्या में गिरावट आई है.

अध्ययन में कहा गया है कि आर्थिक मंदी की वजह से लोगों ने कारों का इस्तेमाल कम कर दिया है.

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