इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएगें कि 11 जुलाई को ही मुंबई की लोकल ट्रेनों में कई बम धमाके हुए जिसकी वजह से 187 लोग मारे गए और करीब 700 लोग घायल हो गए. अमरीकी अंतरिक्ष प्रयोगशाला स्कायलैब 11 जुलाई को ही पृथ्वी पर वापस आ गिरा था.

2006 : मुंबई लोकल ट्रेनों में सीरियल बम धमाके

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Image caption सारे धमाके 11 मिनट के अंतराल में हुए

साल 2006 में इसी दिन मुंबई की लोकल ट्रेनों में सात सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे. वो मंगवार का दिन था और धमाके शाम साढ़े छह बजे से शुरू हुए और करीब 11 मिनट के अंतराल में सात अलग अलग जगहों पर हुए.

ये धमाके उस समय हुए जब ट्रेनें काम से घर लौट रहे लोगों से भरी हुईं थीं. सारे धमाके लोकल ट्रेनों के पहले दर्जे के डब्बों में हुए जिसमे आम तौर पर मध्यम वर्ग के लोग सफ़र करते हैं.

मुंबई पुलिस ने जाँच के बाद बताया कि सभी धमाकों में प्रेशर कुकर का इस्तेमाल किया गया था. पुलिस ने यह भी दावा किया कि इन धमाकों के पीछे इस्लामी संगठनों लश्कर ए तोयबा और सिमी का हाथ है. भारतीय जांचकर्ताओं ने धमाकों की साज़िश के पीछे पकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने की बात कही.

1979 : अमरीकी अंतरिक्ष प्रयोगशाला स्काय लैब धरती पर गिरी

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Image caption स्कायलैब को मई 14 1973 को अंतरिक्ष में छोड़ा गया था

अमरीकी अंतरिक्ष प्रयोगशाला स्कायलैब जुलाई 11 ही के दिन पृथ्वी पर वापस आ गिरा था. इसके अवशेष हिंद महासागर और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में गिरे.

इसके गिरने के पहले पूरे हफ़्ते सारी दुनिया में इस बात पर कयास लगाये जाते रहे कि इसके अवशेष कहां गिरेगें. ये प्रयोगशाला छह साल से अंतरिक्ष में तैर रही थी जिसमे से अंतिम पांच वर्षों में इस पर किसी का नियंत्रण नहीं था.

स्कायलैब को मई 14, 1973 को अंतरिक्ष में छोड़ा गया था. कुल मिला कर तीन अंतरिक्ष यात्रियों के दल इस पर 84 दिनों तक यह जांचने के लिए रहे कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से मनुष्य के शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है.

भारत में भी पूरे देश में पुलिस को अलर्ट कर दिया गया और देश का उड्डयन विभाग इस बात पर विचार करने लगा कि इसके पृथ्वी की सीमा में घुसने के बाद दक्षिण एशिया में हवाई जहाज़ों को ना उड़ने दिया जाये.

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