रूपर्ट मर्डॉक के सामने गंभीर चुनौतियां

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Image caption रूपर्ट मरडॉक न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड का अंतिम अंक पढ़ते हुए

मीडिया सम्राट रूपर्ट मर्डॉक के साप्ताहिक अख़बार न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड का अंतिम अंक रविवार को प्रकाशित हुआ और इसी के साथ 168 सालों का इतिहास बक्से में बंद हो गया.

ये क़दम इसलिए उठाया गया क्योंकि अख़बार के लिए काम करने वाले कुछ पत्रकारों और गुप्तचरों पर मशहूर हस्तियों, राजनेताओं, अफ़ग़ानिस्तान में मारे गए सैनिकों के परिवारजनों और हत्या का शिकार हुए लोगों के परिवार वालों के फ़ोन हैक करने के आरोप हैं.

न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड को लेकर पैदा हुए संकट को देखते हुए रूपर्ट मर्डॉक लंदन आ पहुंचे हैं जिससे ख़ुद कमान संभाल सकें.

इससे पहले उन्होने कहा था कि उन्हें अपने मीडिया साम्राज्य में काम करने वाले पत्रकारों पर पूरा भरोसा है.

जब मर्डॉक लंदन पहुंचे, तो उन्हें न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड का अंतिम अंक पढ़ते देखा गया.

वो सीधे न्यूज़ इंटरनेशनल के प्रमुख अधिकारियों से सलाह मशविरा करने कंपनी के मुख्यालय गए.

उन पर अब ये दबाव भी बढ़ रहा है कि वो सैटेलाइट टेलीविज़न कंपनी बीस्काईबी में पूरी हिस्सेदारी लेने की कोशिश छोड़ दें.

अख़बार के पक्ष में अभियान करने वालों का कहना है कि उसे इसलिए बंद कर दिया गया है जिससे बीस्काईबी की हिस्सेदारी हासिल करने की राह में कोई अड़चन न आए.

अंतिम अंक में अलविदा

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Image caption न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड का अंतिम अंक पढ़ता रेल यात्री

लेकिन न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड में काम करने वाले लोगों के लिए शनिवार की रात बड़ी उथल पुथल भरी रही.

अख़बार का अंतिम अंक प्रकाशित करने के बाद जब 200 से अधिक कर्मचारी एक साथ अख़बार के कार्यालय से बाहर निकले तो वहां मौजूद पत्रकारों ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया.

इस शोर शराबे के बीच ग़ुस्सा भी दिखाई दिया. अख़बार में काम करने वाले एक पत्रकार इयन हाइलैंड ने कहा कि अख़बार बंद करने का निर्णय ग़लत था.

उन्होने कहा, "ग़लत काम करने वालों की हरकतों का पर्दाफ़ाश करने का वो दम ख़म, किसी में नहीं है, जो हममें था".

"भले ही हमारे बहुत से पाठक पिछले कुछ हफ्तों में सामने आई ख़बरों से नाराज़ हों लेकिन एक न एक दिन वो इस बात को स्वीकार करेंगे और इस अख़बार के न छपने से वो अपने जीवन में ख़ालीपन महसूस करेंगे."

इस अंतिम अंक के मुख्य पृष्ठ पर शीर्षक लगा है 'धन्यवाद और अलविदा'.

अख़बार के मुख्य पृष्ठ पर सैकड़ों लोगों के फ़ोन हैक करने के लिए क्षमा याचना छापी गई है.

अख़बार के प्रमुख लेख में स्वीकार किया गया है कि अख़बार पत्रकारिता के मानदंड पर खरा नहीं उतरा.

अख़बार कहता है कि बड़े अफ़सोस की बात है कि सन 2006 तक के कुछ सालों में कुछ पत्रकारों का आचरण सही नहीं रहा.

लेकिन जब इन गंभीर ग़लतियों का प्रायश्चित पूरा हो जाएगा तो हमें उम्मीद है कि इतिहास हमें सिर्फ़ इन सालों से नहीं आंकेगा.

इस बीच इस संकट पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी जारी हैं.

विपक्षी लेबर पार्टी के नेता ऐड मिलिबैंड ने संसद में एक प्रस्ताव रखा है जिसमें कहा गया है कि जब तक इस मामले की पुलिस जांच पूरी नहीं हो जाती न्यूज़ इंटरनेशनल को टीवी प्रसारक बीस्काईबी पर क़ब्ज़ा न करने दिया जाए.

न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड के इस घृणित कृ्त्य से ब्रिटिश जनता में भारी आक्रोश है इसलिए प्रधानमंत्री डेविड कैमरन उसे शांत करने की कोशिश कर रहे हैं.

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